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एफसीआरए संशोधन बिल 2014 में ही लाना चाहिए था : पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय

एफसीआरए संशोधन बिल 2014 में ही लाना चाहिए था : पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय
एफसीआरए संशोधन बिल 2014 में ही लाना चाहिए था : पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय

कोलकाता, 6 अगस्त (आईएएनएस)। त्रिपुरा के पूर्व राज्यपाल और भाजपा नेता तथागत रॉय ने गुरुवार को कोलकाता में शेख हसीना, बांग्लादेश, पश्चिम बंगाल और एफसीआरए संशोधन बिल जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने देश-विरोधी तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, कानूनों को कड़ाई से लागू करने और युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भागीदारी का समर्थन किया।

पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय ने एफसीआरए संशोधन बिल पर आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "मैं कहूंगा कि यह बिल 2014 में ही लाया जाना चाहिए था। एफसीआरए कानून पहले से मौजूद था, लेकिन उसमें जरूरी मजबूती और उसे लागू करने की क्षमता की कमी थी। सरकार के पास एफसीआरए के तहत विदेश से पैसे भेजने वालों को रोकने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। लोगों ने नियमों से बचने के तरीके ढूंढ लिए और अलग-अलग रास्तों से फंड भेजना जारी रखा, इसलिए कानून को और सख्त करने की जरूरत थी।"

पश्चिम बंगाल में मस्जिदों पर लाउडस्पीकर के विवाद पर भी उन्होंने टिप्पणी की। रॉय ने कहा कि धार्मिक प्रथाओं को पारंपरिक तरीके से निभाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मस्जिदों पर लाउडस्पीकर क्यों होने चाहिए? जो लोग इसे सुनना चाहते हैं वे मुसलमान हैं, खासकर सुन्नी मुसलमान, जो अपनी मान्यताओं और शिक्षाओं का पालन करते हैं। वे क्या मानते हैं? वे पैगंबर मोहम्मद की परंपराओं का पालन करना और उनके बताए रास्ते पर चलना चाहते हैं। क्या पैगंबर मोहम्मद के समय में माइक्रोफोन था? अगर तब माइक्रोफोन नहीं था तो अब भी इसे हटा दिया जाना चाहिए। अगर लोगों को नमाज के लिए बुलाना है तो उन्हें पारंपरिक तरीके से बुलाया जाना चाहिए।"

बांग्लादेश के हालात और वहां रह रहे हिंदुओं की स्थिति पर तथागत रॉय ने गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश भले ही विदेशी देश है, लेकिन वहां हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार भारत के लिए चिंता का विषय हैं। रॉय ने कहा, "बांग्लादेश हमारे लिए एक विदेशी देश है, भले ही हमारे पूर्वज वहां पैदा हुए हों। मेरा पुश्तैनी घर बांग्लादेश में था, लेकिन आज वह एक अलग देश है, इसलिए वहां क्या हो रहा है, इसे लेकर हम बहुत ज्यादा चिंतित नहीं हैं, सिवाय एक मुद्दे के जो मुझे बहुत परेशान करता है, बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत।"

उन्होंने कहा, "1947 से पिछले 75 सालों में बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति लगातार खराब हुई है। कई बार तो हालात इतने बुरे हो गए हैं कि उन्हें शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ऐसा 1950, 1964, 1971 और फिर 2001-2004 के दौरान हुआ। हम इसलिए चिंतित हैं, क्योंकि अगर हिंदुओं पर ऐसे ही अत्याचार होते रहे तो वे स्वाभाविक रूप से भारत आएंगे। भारत की आबादी पहले ही काफी बढ़ चुकी है, इसलिए इससे और चुनौतियां पैदा होंगी।"

इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने एक सुझाव भी दिया। रॉय ने कहा, "इस स्थिति से निपटने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं, जिनमें से एक यह है कि बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन को अलग कर दिया जाए।"

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी

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