एफसीआरए को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा, कहा- 'आरएसएस के दबाव में लाया गया विधेयक'
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। संसद के मौजूदा सत्र में 'विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (एफसीआरए) संशोधन विधेयक, 2026' और बढ़ती महंगाई को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने इस विधेयक को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ बताया है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह ने आरोप लगाया कि यह पूरा मुद्दा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दबाव में उठाया गया है। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी फंड को एक तरह से आरएसएस समर्थित संगठनों की ओर मोड़ा जा रहा है। उनके अनुसार, सरकारी दबाव में बड़ी मात्रा में फंड इन संगठनों को दिया जा रहा है, जबकि आदिवासी, पिछड़े और दलित क्षेत्रों में काम करने वाले कई सामाजिक संगठनों को निशाना बनाया जा रहा है।
सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि एफसीआरए कानून का उद्देश्य राष्ट्रीय हित नहीं, बल्कि विशेष संगठनों के हित साधना है।
समाजवादी पार्टी के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने भी इस विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि यह अल्पसंख्यक समुदायों को निशाना बनाने के लिए लाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में अल्पसंख्यकों का प्रभाव अधिक है, वहां की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित करने के लिए इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं। उनके मुताबिक, यह विधेयक क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने की एक रणनीति का हिस्सा है।
महंगाई के मुद्दे पर भी विपक्ष ने सरकार को घेरा। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालिया वृद्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि सरकार का दोहरा रवैया अब जनता के सामने उजागर हो चुका है। उन्होंने कहा कि संसद और चुनावी मंचों पर सरकार जो दावे करती है, वे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। उन्होंने आशंका जताई कि फिलहाल कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की गई है, लेकिन चुनावों के बाद इसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है।
पुष्पेंद्र सरोज ने कहा कि जनता परेशान हो रही है, अब भाजपा नेता इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वो बस अपनी जेब भरने में लगे हैं। जनता इसका जवाब जल्द ही देने वाली है।
वहीं, कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने एफसीआरए संशोधन विधेयक को संविधान के अनुच्छेद 300ए का उल्लंघन बताया। उन्होंने इसे संगठनों की संपत्तियों पर सीधा प्रहार बताते हुए कहा कि यह कानून वैध रूप से मौजूद संसाधनों को छीनने जैसा है।
--आईएएनएस
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