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एफसीआरए बिल पर जेपीसी में चर्चा अच्छी पहल, सरकार को देना चाहिए पर्याप्त समय: आनंद दुबे

एफसीआरए बिल पर जेपीसी में चर्चा अच्छी पहल, सरकार को देना चाहिए पर्याप्त समय: आनंद दुबे
एफसीआरए बिल पर जेपीसी में चर्चा अच्छी पहल, सरकार को देना चाहिए पर्याप्त समय: आनंद दुबे

मुंबई, 12 अगस्त (आईएएनएस)। शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने पर्यावरण संरक्षण, एफसीआरए बिल, अभिनेत्री कंगना रनौत और नसीरुद्दीन शाह के बीच विवाद, एयर इंडिया के पायलट के ड्रग टेस्ट में फेल होने और सुनेत्रा पवार को लेकर चल रही बयानबाजी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अलग-अलग मुद्दों पर अपनी पार्टी का पक्ष रखते हुए नेताओं से संयम बरतने और गंभीर विषयों पर प्राथमिकता से चर्चा करने की अपील की।

पर्यावरण से जुड़े मुद्दे पर आनंद दुबे ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए किसी नेता या अभिनेता के कहने की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि पर्यावरण से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञ और संबंधित अधिकारी समय-समय पर यह बताते रहते हैं कि किन चीजों से समाज और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। कई रसायन और अन्य पदार्थ मनुष्यों के साथ-साथ पशु-पक्षियों के लिए भी नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में यदि समय-समय पर पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों में बदलाव होते हैं, तो यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और लोगों को भी इन नियमों का पालन करना चाहिए। महाराष्ट्र में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पहले से प्रतिबंध है। इसलिए पर्यावरण से जुड़े किसी भी नए नियम या बदलाव के लिए लोगों को तैयार रहना चाहिए और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिए।

विदेशी अंशदान नियमन कानून यानी एफसीआरए से जुड़े प्रस्तावित बदलावों पर आनंद दुबे ने कहा कि यह कानून पहली बार 1976 में लागू हुआ था और इसके बाद इसमें कई बार संशोधन किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार या विपक्ष इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा चाहता है और इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजा जा रहा है, तो यह अच्छी बात है। जेपीसी में विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसद और प्रतिनिधि शामिल होते हैं। समिति में प्रस्तावित कानून पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर सुझाव दिए जा सकते हैं। यदि ड्राफ्ट में किसी तरह के बदलाव की आवश्यकता महसूस होती है, तो उस पर भी विचार किया जा सकता है।

आनंद दुबे ने कहा कि सरकार को इस प्रक्रिया के लिए पर्याप्त समय देना चाहिए। जेपीसी की अंतिम रिपोर्ट उसके चेयरमैन द्वारा सौंपे जाने के बाद सरकार आगे कोई विधेयक लाती है या उस पर सदन में चर्चा और मतदान होता है, यह बाद का विषय है। फिलहाल व्यापक चर्चा जरूरी है।

अभिनेत्री कंगना रनौत और नसीरुद्दीन शाह के बीच विवाद पर आनंद दुबे ने कहा कि कंगना रनौत पहले भी कई विवादित बयान दे चुकी हैं। उन्होंने कहा कि देश में कलाकारों के बीच होने वाली बयानबाजी को जरूरत से ज्यादा महत्व देने के बजाय देश के बड़े मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है और ऐसे समय में इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि देश ने क्या हासिल किया, क्या खोया और आगे क्या करना है। कंगना रनौत और नसीरुद्दीन शाह दोनों कलाकार हैं। आज दोनों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन संभव है कि भविष्य में दोनों साथ बैठकर बातचीत भी करें। इसलिए उनकी व्यक्तिगत बयानबाजी को देश से बड़ा मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। देश सबसे पहले है, राष्ट्र सबसे पहले है और वंदे मातरम सबसे पहले है। देशभक्ति राजनीतिक या व्यक्तिगत विवादों से ऊपर होनी चाहिए।

कंगना रनौत के बयानों को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए आनंद दुबे ने कहा कि कंगना एक महिला होने के साथ-साथ सांसद भी हैं और उन्हें अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए। कंगना जितना कम बोलेंगी, उतना ही भाजपा के लिए अच्छा होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा और कंगना रनौत को इस मामले में स्वयं तय करना है कि उन्हें किस तरह की राजनीति और बयानबाजी करनी है।

फुकेत-दिल्ली उड़ान से जुड़े एयर इंडिया के पायलट के ड्रग टेस्ट में कथित तौर पर फेल होने के मामले को आनंद दुबे ने बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि विमान उड़ाने वाले लोग नशे की हालत में ड्यूटी करते हैं तो इससे सैकड़ों यात्रियों की जिंदगी खतरे में पड़ सकती है। एयर इंडिया से जुड़ा मामला होने के कारण सरकार को इस तरह के मामलों में विशेष रूप से सतर्क और सख्त रहना चाहिए। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और ऐसे पायलटों को यात्रियों की जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए, जिनसे उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। यात्रियों की जिंदगी के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता।

सुनेत्रा पवार को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर आनंद दुबे ने नेताओं से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र की बेटी और बहन बताते हुए कहा कि वह अजीत पवार की पत्नी हैं और ऐसे समय में जब अजीत पवार हमारे बीच नहीं हैं, तब बार-बार सुनेत्रा पवार को अपमानित करने वाली टिप्पणियां नहीं की जानी चाहिए। कभी किसी महिला को 'गूंगी गुड़िया' कहना और कभी उसकी अंग्रेजी को लेकर टिप्पणी करना उचित नहीं है। किसी के परिवार और उसकी पृष्ठभूमि के बारे में जाने बिना इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणियां करना सही नहीं है।

उन्होंने कहा कि पवार परिवार महाराष्ट्र का एक प्रतिष्ठित और बड़ा राजनीतिक परिवार है। राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक मतभेद और राजनीतिक संघर्ष अपनी जगह हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप से किसी महिला का अपमान करना महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा नहीं होना चाहिए।

सुनेत्रा पवार को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण की ओर इशारा करते हुए आनंद दुबे ने कहा कि उन्हें किसी भी तरह की टिप्पणी करने से पहले सोच-विचार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चव्हाण वरिष्ठ नेता हैं और उनसे अधिक जिम्मेदारी तथा संयम की उम्मीद की जाती है। महाराष्ट्र की राजनीति में मतभेद और तीखी वैचारिक लड़ाई लंबे समय से रही है, लेकिन राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत अपमान के स्तर तक नहीं ले जाना चाहिए। राजनीति में असहमति हो सकती है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए कि भविष्य में एक-दूसरे के सामने आने पर नजरें झुकानी पड़ें। महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति और परंपरा को बनाए रखना सभी नेताओं की जिम्मेदारी है।

--आईएएनएस

पीएसके

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