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दिल्ली: साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़, 8 दिनों में 16 करोड़ के लेन-देन में दो आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तरी जिले की साइबर पुलिस ने एक बड़े संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी बैंक खातों और शेल कंपनियों के जरिए ठगी की रकम को देश और विदेश में भेजकर उसे वैध बनाने का काम कर रहा था। इस कार्रवाई से साइबर अपराध गिरोहों की मजबूत वित्तीय संरचना का खुलासा हुआ है।
दिल्ली: साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़, 8 दिनों में 16 करोड़ के लेन-देन में दो आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तरी जिले की साइबर पुलिस ने एक बड़े संगठित साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी बैंक खातों और शेल कंपनियों के जरिए ठगी की रकम को देश और विदेश में भेजकर उसे वैध बनाने का काम कर रहा था। इस कार्रवाई से साइबर अपराध गिरोहों की मजबूत वित्तीय संरचना का खुलासा हुआ है।

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल और समन्वय पोर्टल के डाटा विश्लेषण के आधार पर यह मामला सामने आया। जांच के दौरान देशभर में दर्ज 336 साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से जुड़े कई संदिग्ध बैंक खातों का पता चला। जांच का केंद्र एक बैंक खाता बना, जो बावना स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा में मेस्सिट ट्रेडेक्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से संचालित था। यह खाता असामान्य और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के कारण जांच के घेरे में आया और बाद में कई राज्यों में दर्ज साइबर अपराध मामलों से जुड़ा पाया गया।

जांच में सामने आया कि इस खाते में केवल आठ दिनों के भीतर 16 करोड़ से अधिक का लेन-देन हुआ, जो बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित साइबर अपराध की ओर इशारा करता है। यह खाता मनी ट्रेल के कई स्तरों पर सक्रिय पाया गया और इसके जरिए धन को बार-बार अलग-अलग खातों में घुमाया जा रहा था।

पुलिस ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सोनू कुमार और अमिंदर सिंह शामिल हैं। ये फर्जी कंपनी में डमी डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे थे और उनके नाम पर बैंक खाते खोले गए थे, जबकि उनका वास्तविक नियंत्रण साइबर अपराधियों के पास था।

जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क 35 से अधिक शेल कंपनियों से जुड़ा हुआ है, जो देश के विभिन्न हिस्सों में फर्जी तरीके से संचालित की जा रही थीं। दिल्ली के पीतमपुरा, रानी बाग और एनएसपी जैसे क्षेत्रों में इनके संचालन केंद्र पाए गए हैं।

पुलिस के अनुसार इस गिरोह का तरीका यह था कि कमजोर और जरूरतमंद लोगों को नौकरी या आसान कमाई का लालच देकर उन्हें फर्जी कंपनियों का निदेशक बनाया जाता था। इनके नाम पर बैंक खाते खोले जाते थे, लेकिन उन खातों का पूरा नियंत्रण साइबर अपराधी दूर से अपने पास रखते थे। इन खातों का इस्तेमाल देशभर में लोगों से ठगी की गई रकम प्राप्त करने, उसे तेजी से कई खातों में ट्रांसफर करने और मनी ट्रेल छिपाने के लिए किया जाता था। जांच के दौरान पुलिस को बैंक खाते से जुड़े रिकॉर्ड, डिजिटल लेन-देन डेटा, केवाईसी दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्य भी मिले हैं, जो इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को स्पष्ट करते हैं।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के लालच में आकर अपने बैंक खाते या केवाईसी दस्तावेज किसी अजनबी के साथ साझा न करें और न ही किसी फर्जी कंपनी में बिना जांच-पड़ताल के निदेशक बनें।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ऐसी गतिविधियों में शामिल होना गंभीर कानूनी अपराध है। पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े संगठित साइबर वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा है, जिसकी जांच और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई जारी है।

--आईएएनएस

ओपी/वीसी

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