जम्मू में फारूक अब्दुल्ला पर फायरिंग, वीडियो में जाने सुरक्षा की वजह से गोली नहीं लगी
राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला बुधवार रात एक जानलेवा हमले से बाल-बाल बच गए। जानकारी के अनुसार, फारूक अब्दुल्ला जम्मू में एक शादी समारोह में शामिल होने पहुंचे थे, तभी एक व्यक्ति ने उनके ऊपर फायरिंग करने का प्रयास किया। गनीमत यह रही कि सुरक्षा कर्मियों की तत्परता के कारण गोली उन्हें नहीं लगी।
घटना के समय उनके साथ राज्य के उप मुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी भी मौजूद थे। सूत्रों ने बताया कि हमलावर ने पीछे से आकर फारूक अब्दुल्ला के सिर पर रिवॉल्वर तान दी, लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हस्तक्षेप किया और हमलावर का हाथ रोक दिया, जिससे फायर हवा में चला गया और किसी को चोट नहीं लगी।
घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। इसमें साफ देखा जा सकता है कि 70 वर्षीय हमलावर कमल सिंह जामवाल ने जानबूझकर हमला किया। पुलिस ने आरोपी को तुरंत पकड़ लिया और उसे हिरासत में ले लिया गया। शुरुआती पूछताछ में कमल सिंह ने पुलिस को बताया कि वह पिछले 20 सालों से फारूक अब्दुल्ला को मारने की योजना बना रहा था और यही उसका मकसद था।
जम्मू पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि हमले की पृष्ठभूमि और कारणों की जांच की जा रही है। आरोपी के मानसिक और राजनीतिक झुकाव की भी पड़ताल की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि घटना के समय समारोह में भारी संख्या में लोग मौजूद थे, लेकिन किसी तरह की अफरा-तफरी या घायल होने की सूचना नहीं है।
घटना ने जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक हलकों और आम जनता के बीच चिंता बढ़ा दी है। फारूक अब्दुल्ला ने खुद घटना के बाद कहा कि वह सुरक्षित हैं और सुरक्षा कर्मियों की तत्परता के कारण किसी तरह की चोट नहीं आई। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि हिंसा किसी भी राजनीतिक मतभेद का समाधान नहीं हो सकती।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमले न केवल व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए चुनौती हैं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और राजनीतिक स्थिरता के लिए भी खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने बताया कि सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे उच्च-प्रोफाइल नेताओं की सुरक्षा को और कड़ा करना चाहिए और संभावित खतरों के बारे में सतर्क रहना चाहिए।
इस हमले के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है और अधिकारियों ने विवाह समारोहों और सार्वजनिक आयोजनों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को और मजबूत करने का आदेश दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति की मानसिक स्थिति का परिणाम हो सकता है, लेकिन इसका असर राजनीतिक वातावरण पर भी पड़ सकता है। ऐसे मामलों में सुरक्षा की सख्ती और सार्वजनिक आयोजनों में सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

