फारूक अब्दुल्ला के बयान पर मनोज तिवारी का पलटवार, बोले- भारत की एकता एवं अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के हालिया बयान को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने उनके बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फारूक अब्दुल्ला अक्सर पाकिस्तान के प्रति नरम रुख दिखाते रहे हैं और अपने विवादित बयानों के लिए जाने जाते हैं।
दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मनोज तिवारी ने कहा कि देश में कुछ राजनीतिक दल और नेता ऐसे हैं जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की बात करने वालों के खिलाफ विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।
मनोज तिवारी ने कहा कि देश की जनता अब ऐसे बयानों को समझती है और भारत की एकता एवं अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि देश की माताएं और बहनें भारत को विभाजित करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने देंगी।
फारूक अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि वह समय-समय पर पाकिस्तान को लेकर बयान देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश उनके और उनके जैसे नेताओं के विचारों को अच्छी तरह समझता है। तिवारी ने कहा कि इस मामले में जो भी कार्रवाई होगी, वह संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी।
वहीं, उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बोलते हुए मनोज तिवारी ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन को प्रभावहीन बताते हुए कहा कि विपक्षी दल आपसी मतभेदों से ही जूझ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा का अभियान लगातार आगे बढ़ता रहेगा।
दरअसल, बारामूला में एक कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि पाकिस्तान विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरियों का मुद्दा उठाता है और इसी वजह से जम्मू-कश्मीर के लोग बचे हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि कश्मीरियों के प्रति भारत के इरादे सही नहीं हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने जम्मू-कश्मीर की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए थे। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबे समय से लंबित हैं और संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित हुई है।
फारूक अब्दुल्ला ने लोगों से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील करते हुए कहा था कि उन्हें दिल्ली से न्याय की ज्यादा उम्मीद नहीं है और जनता को अपने हक के लिए संघर्ष करना होगा। उनके इस बयान को कांग्रेस के नेताओं ने भी गलत बताया है, जबकि भाजपा नेताओं ने पलटवार किया है।
--आईएएनएस
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