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फार्मर आईडी से बदलेगा खाद, लोन और मदद का सिस्टम: शिवराज सिंह चौहान

जयपुर/नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। जयपुर में मंगलवार को पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन से कृषि सुधारों के नए युग की मजबूत शुरुआत हुई, जहां केंद्र-राज्य साझेदारी, किसानों की आय वृद्धि, फूड व न्यूट्रीशन सिक्योरिटी, फार्मर आईडी आधारित डिजिटल कृषि और लचीली योजनाओं के क्रियान्वयन पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रोडमैप रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सशक्त किसान, समृद्ध भारत’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस की यह नई श्रंखला केंद्र और राज्यों के लिए साझा ‘एक्शन-प्लेटफॉर्म’ के रूप में सामने आई हैं।
फार्मर आईडी से बदलेगा खाद, लोन और मदद का सिस्टम: शिवराज सिंह चौहान

जयपुर/नई दिल्ली, 7 अप्रैल (आईएएनएस)। जयपुर में मंगलवार को पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन से कृषि सुधारों के नए युग की मजबूत शुरुआत हुई, जहां केंद्र-राज्य साझेदारी, किसानों की आय वृद्धि, फूड व न्यूट्रीशन सिक्योरिटी, फार्मर आईडी आधारित डिजिटल कृषि और लचीली योजनाओं के क्रियान्वयन पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रोडमैप रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सशक्त किसान, समृद्ध भारत’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस की यह नई श्रंखला केंद्र और राज्यों के लिए साझा ‘एक्शन-प्लेटफॉर्म’ के रूप में सामने आई हैं।

जयपुर के होटल मैरियट में आयोजित पश्चिमी क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि एक दिन की औपचारिक रबी–खरीफ मीटिंग की जगह अब अलग-अलग एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के लिए गंभीर, विषय-आधारित क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं। सम्मेलन की इस नई श्रृंखला की शुरुआत राजस्थान की धरती से होना उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण बताया, जहां राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गोवा के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और प्रगतिशील किसान एक मंच पर जुटे, वहीं उद्घाटन सत्र में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने स्पष्ट किया कि यह केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी क्षेत्र की कृषि पर संपूर्णता से मंथन का प्रयास है, जिसमें पूरे दिन प्रजेंटेशन, वीडियो और विषयवार चर्चा के बाद ठोस निष्कर्ष और ‘टू-डू लिस्ट’ के साथ राज्यों को आगे बढ़ने का रोडमैप तय किया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि के लिए तीन मुख्य लक्ष्य रेखांकित किए- देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि और पोषण सुरक्षा। उन्होंने कहा कि गेहूं और चावल में भारत के भंडार इतने हैं कि रखने की जगह तक की चुनौती है, लेकिन दलहन और तिलहन में आत्मनिर्भरता अभी हासिल करनी है ताकि खाद्य सुरक्षा पूरी तरह देश की अपनी उत्पादन क्षमता पर आधारित हो सके और आयात पर निर्भरता खत्म हो।

उन्होंने दोहराया कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ और किसान उसकी आत्मा हैं, इसलिए किसानों की आय बढ़ाना, जीवन स्तर सुधारना और खेती को आसान बनाना सरकार की प्राथमिकता है, साथ ही जनता को पोषक आहार उपलब्ध कराने के लिए पोषण सुरक्षा को नीति का अनिवार्य अंग बताया।

शिवराज सिंह ने फार्मर आईडी को आने वाले समय की सबसे उपयोगी व्यवस्था बताते हुए कहा कि एक प्रमाणित डिजिटल प्रोफाइल के आधार पर बैंक लोन से लेकर सरकारी मदद तक सब कुछ तेज़ और पारदर्शी तरीके से किसानों तक पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि कुछ राज्यों में फार्मर आईडी के माध्यम से कुछ ही दिनों में हजारों करोड़ रुपए सीधे किसानों के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं और आगे खाद वितरण जैसी संवेदनशील व्यवस्था भी किसान की भूमि और बोई गई फसल के आधार पर फार्मर आईडी से ही लिंक की जाएगी, ताकि सस्ता खाद डायवर्जन रोका जा सके।

उन्होंने पश्चिम एशिया/मिडिल ईस्ट की परिस्थितियों के संदर्भ में वैश्विक अनिश्चितताओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे संकट के दौर में डिजिटल और डेटा आधारित कृषि प्रशासन के माध्यम से ही देश और किसानों को सुरक्षित रखा जा सकता है, इसलिए सभी राज्यों को फार्मर आईडी के काम को मिशन मोड में 100 प्रतिशत पूरा करने का आग्रह किया गया।

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि दलहन और तिलहन की खरीद पीएम-एएएसएचए के माध्यम से कृषि विभाग द्वारा और गेहूं-चावल की खरीद खाद्य विभाग द्वारा की जा रही है तथा राज्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों के अनुरूप ही खरीद की स्वीकृति दी गई है, लेकिन समयबद्ध खरीद सुनिश्चित करना राज्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चने, मसूर और तुअर की 100 प्रतिशत खरीद की जाएगी और जहाँ फिजिकल खरीद संभव नहीं है, वहाँ मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के मॉडल पर सरसों और सोयाबीन में भावांतर भुगतान के माध्यम से एमएसपी और बाजार भाव के अंतर की भरपाई किसानों के खातों में सीधे की जा सकती है।

उन्होंने आलू, प्याज, टमाटर जैसी फसलों में अंतरराष्ट्रीय कारणों से गिरती कीमतों की चुनौती का उल्लेख करते हुए MIS व्यवस्था की उपयोगिता समझाई, जिसमें मॉडल रेट और बाजार भाव के अंतर का भुगतान सीधा किसान को किया जा सकता है, जिसमें 50 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार वहन करेगी, साथ ही जिन राज्यों की एजेंसियाँ किसानों की उपज को उत्पादन क्षेत्र से बड़े शहरों तक ले जाना चाहेंगी, उनके लिए ट्रांसपोर्ट सब्सिडी देने का निर्णय भी साझा किया।

केंद्रीय मंत्री चौहान ने सभी राज्यों से कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान अब एक साथ पूरे देश में न करके राज्यों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार किया जाएगा और जो भी राज्य समय-सारिणी और कार्यक्रम भेजेंगे, वहां भारत सरकार वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों, अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों की टीम भेजकर अभियान को गति देगी। राजस्थान के संदर्भ में उन्होंने आईसीएआर के वैज्ञानिकों की विशेष टीम भेजने की घोषणा की, जो राज्य के तय कार्यक्रम में खेत स्तर पर वैज्ञानिक सलाह और नवाचारों का विस्तार करेगी।

उन्होंने यह भी बताया कि आज से राज्यों के कृषि रोडमैप तैयार करने की प्रक्रिया को भी संस्थागत सहयोग मिलेगा। राजस्थान ने कृषि रोडमैप में भारत सरकार की साझेदारी की पहल की है और इसके लिए आईसीएआर के वैज्ञानिकों और मंत्रालय के नोडल अधिकारी की संयुक्त टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करेगी, जबकि अन्य राज्यों को भी उनके कृषि रोडमैप के लिए पूरा सहयोग दिया जाएगा।

शिवराज सिंह चौहान ने 1 अप्रैल से लागू नए बजट को तुरंत राज्यों को रिलीज़ करने और वर्ष की शुरुआत से ही योजनाओं के ज़मीनी क्रियान्वयन पर फोकस करने की अपील की, ताकि साल के अंत में बजट बचने और जल्दबाजी में खर्च की स्थिति न बने। उन्होंने बताया कि राज्यों की मांग पर इस बार यह व्यवस्था की गई है कि केंद्र कोई योजना ऊपर से थोपेगा नहीं, बल्कि योजनाओं में से राज्य अपनी ज़रूरत के मुताबिक प्राथमिकता चुनेंगे– चाहे बात तारबाड़बंदी की हो या ‘पर ड्रॉप, मोर क्रॉप’ के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई की।

उन्होंने ‘टीम एग्रीकल्चर’ की अवधारणा रखते हुए कहा कि नीतियाँ और कार्यक्रम केंद्र बनाएगा, लेकिन असली क्रियान्वयन राज्यों के हाथ में है, इसलिए जितनी गंभीरता और प्राथमिकता से राज्य सरकारें काम करेंगी, उतनी ही सफलता किसानों तक योजनाओं के लाभ पहुंचाने में मिलेगी।

हाल के मौसमीय असंतुलन और नुकसान का जिक्र करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने राज्यों से नुकसान के सही आकलन और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया, ताकि प्रभावित किसानों को पूरा लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जमीन पर सक्रिय भूमिका राज्यों की होगी और केंद्र की ओर से किसानों को भरपूर सहयोग देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।

विश्व स्वास्थ्य दिवस के संदर्भ में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के स्वस्थ भारत के संदेश का हवाला देते हुए अपील की कि तेल और भोजन की मात्रा में संयम के साथ सभी अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें, क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन रहता है और कृषि नेतृत्व को भी फिट रहकर किसानों की सेवा में जुटे रहने की प्रेरणा दी।

--आईएएनएस

डीकेपी/

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