सोशल मीडिया आज के समय में जानकारी और मनोरंजन का सबसे बड़ा मंच बन गया है। हर दिन लाखों फोटो और वीडियो यूज़र्स के बीच साझा होते हैं। इनमें से कुछ वीडियो और तस्वीरें मनोरंजन या जानकारी देने के उद्देश्य से होती हैं, लेकिन कई बार ऐसे कंटेंट भ्रामक दावों के साथ वायरल कर दिए जाते हैं। यह फैक्ट न केवल लोगों को भ्रमित करता है बल्कि समाज में अफवाहें फैलाने का भी माध्यम बन जाता है।
एआई (Artificial Intelligence) के इस युग में फेक वीडियो और फोटो की बाढ़ सी आ गई है। तकनीक की मदद से वीडियो और तस्वीरें वास्तविकता जैसी दिखने लगी हैं, जिससे पहचान करना और भी मुश्किल हो गया है। फेक वीडियो को देखकर आम यूज़र्स अक्सर यह मान लेते हैं कि जो देखा जा रहा है वह सच है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर फेक कंटेंट तेजी से फैलता है और वायरल हो जाता है।
इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए इंडिया टीवी ने फैक्ट चेक टीम की मदद से ऐसे वायरल वीडियो और तस्वीरों की सत्यता की जांच शुरू की है। फैक्ट चेक टीम इन वायरल वीडियो का विश्लेषण करती है, स्रोत की पहचान करती है और तकनीकी उपकरणों के जरिए पता लगाती है कि वीडियो या फोटो वास्तविक है या फेक। टीम ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अक्सर समय, स्थान और घटनाओं को बदलकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जाती है।
इंडिया टीवी के फैक्ट चेकर बताते हैं कि फेक वीडियो की पहचान करने के लिए कई तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इनमें वीडियो के मेटाडेटा की जांच, फ्रेम-बाय-फ्रेम विश्लेषण, और विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापन शामिल है। इसके अलावा, यूज़र्स द्वारा साझा की गई जानकारी और संदर्भ की जांच भी जरूरी होती है। फैक्ट चेकिंग का उद्देश्य केवल गलत सूचना को रोकना ही नहीं है, बल्कि लोगों को सचेत करना और सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी से कंटेंट साझा करने की आदत डालना भी है।
सोशल मीडिया पर फैक्ट चेक रिपोर्ट तेजी से वायरल हो रही हैं और लोगों को यह समझाने में मदद कर रही हैं कि हर वायरल कंटेंट पर विश्वास करना सही नहीं है। फैक्ट चेक वीडियो और रिपोर्ट दर्शकों को शिक्षित करती हैं कि कैसे फेक वीडियो को पहचाना जाए और किस तरह सोशल मीडिया पर सचेत रहकर जानकारी साझा की जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में हर यूज़र का जिम्मेदारी से सोशल मीडिया इस्तेमाल करना जरूरी है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और फोटो के पीछे छिपे भ्रामक दावे किसी भी समय अफवाह और गलतफहमी का कारण बन सकते हैं। इसलिए फैक्ट चेकिंग न केवल पत्रकारिता की गुणवत्ता बढ़ाती है बल्कि समाज में सही सूचना और जागरूकता फैलाने का काम भी करती है।
अंततः, सोशल मीडिया पर वायरल फेक वीडियो और फोटो की चुनौती आज हर यूज़र के सामने है। इंडिया टीवी की फैक्ट चेक टीम इस चुनौती का मुकाबला कर रही है और लोगों को सचेत कर रही है। उनका यह प्रयास यह साबित करता है कि डिजिटल दुनिया में जिम्मेदारी, सतर्कता और सही जानकारी का महत्व पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है।

