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Fake PMO Officer Rohan Parekh: प्रधानमंत्री कार्यालय के नाम पर धोखा! जानिए रोहन पारेख का सच

Fake PMO Officer Rohan Parekh: प्रधानमंत्री कार्यालय के नाम पर धोखा! जानिए रोहन पारेख का सच

मुंबई के जियो वर्ल्ड प्लाजा में कथित तौर पर PMO अधिकारी बनकर प्रवेश करने की कोशिश का मामला सामने आया है. पुलिस ने इस मामले में 24 वर्षीय रोहन पारेख और उसके साथ मौजूद दिलीप कुंडे को गिरफ्तार किया है. रोहन एक हीरा कारोबारी का बेटा बताया जा रहा है और उसने ब्रिटेन की एक यूनिवर्सिटी से गणित और भौतिकी में ग्रेजुएशन किया है. हालांकि, अदालत में उसके वकील ने दावा किया कि संभव है कि रोहन खुद भी किसी कथित फर्जीवाड़े का शिकार हुआ हो.

यह मामला उस समय सामने आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंगलवार शाम जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित 7वें ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में शामिल होने का कार्यक्रम था. जियो वर्ल्ड प्लाजा भी इसी परिसर का हिस्सा है. मामले में पुलिस एक अन्य आरोपी की तलाश कर रही है.

सुरक्षा जांच के दौरान सामने आया मामला

पुलिस के मुताबिक, रोहन पारेख दो अन्य लोगों के साथ जियो वर्ल्ड प्लाजा पहुंचा था. प्रवेश के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों ने एक व्यक्ति के पास हथियार देखा. इसके बाद तीनों को रोककर पूछताछ की गई.

आरोप है कि रोहन ने खुद को प्रधानमंत्री कार्यालय यानी PMO का अधिकारी बताया और मोबाइल फोन पर एक कथित पहचान पत्र दिखाया. इसके बाद उसे परिसर में प्रवेश की अनुमति मिल गई.

वहीं हथियार लेकर पहुंचे व्यक्ति ने खुद को स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) का सदस्य बताया. हालांकि, सुरक्षा कर्मचारियों को उस पर शक हुआ और उसे तीसरे व्यक्ति के साथ रोक लिया गया. कुछ मिनट बाद रोहन भी परिसर से बाहर आ गया और तीनों वहां से चले गए.

मर्सिडीज कार से पुलिस को मिला सुराग

घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने आरोपियों की पहचान के लिए CCTV फुटेज खंगाली. फुटेज में तीनों एक मर्सिडीज कार से आते दिखाई दिए.

पुलिस ने कार के रजिस्ट्रेशन नंबर की जांच की तो वाहन खार निवासी रोहन प्रेमल पारेख के नाम पर दर्ज मिला. इसके बाद पुलिस की टीम खार वेस्ट स्थित उसके घर पहुंची और उसे हिरासत में ले लिया.

पूछताछ में रोहन ने बताया कि उसके साथ मौजूद दो लोगों में एक उसका दोस्त प्रथमेश बागुल और दूसरा दिलीप कुंडे था, जो उसका बॉडीगार्ड था. पुलिस ने कुंडे को गिरफ्तार कर लिया, जबकि 26 वर्षीय प्रथमेश बागुल की तलाश जारी है.

बॉडीगार्ड के पास मिला रिवॉल्वर और छह कारतूस

पुलिस के अनुसार, दिलीप कुंडे नासिक का रहने वाला पूर्व सैन्यकर्मी है और रोहन के पिता के लिए बॉडीगार्ड के तौर पर काम करता था. उसके पास लाइसेंसी हथियार था.

जांच के दौरान पुलिस ने कुंडे के पास से एक रिवॉल्वर और छह जिंदा कारतूस बरामद किए हैं. रोहन पारेख और दिलीप कुंडे को अदालत में पेश किया गया, जहां दोनों को 11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

PMO में नौकरी का दावा कैसे जुड़ा?

पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि रोहन ने PMO अधिकारी होने का दावा क्यों किया और उसके पास मौजूद कथित पहचान पत्र व अन्य दस्तावेज कहां से आए.

अदालत में रोहन के वकील आनंदिनी फर्नांडिस ने दावा किया कि करीब दो साल पहले रोहन की मुलाकात तरुण कपूर नाम के एक व्यक्ति से हुई थी. कथित तौर पर कपूर ने उसे PMO में नौकरी दिलाने का प्रस्ताव दिया था. इसके लिए उसे हर महीने 68 हजार रुपये वेतन देने की बात कही गई थी.

वकील के मुताबिक, रोहन को बताया गया था कि वह PMO में रक्षा नीति से जुड़े काम करेगा. इसी दौरान उसे प्रधानमंत्री के कथित हस्ताक्षर वाला एक पत्र और PMO का डिजिटल पहचान पत्र भी दिया गया था.

‘रोहन खुद भी हो सकता है ठगी का शिकार’

मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में बचाव पक्ष ने दावा किया कि रोहन संभवतः खुद भी किसी फर्जीवाड़े का शिकार हुआ है. वकील का कहना था कि उनके मुवक्किल को PMO में नौकरी और पहचान से जुड़े कथित दस्तावेज दिए गए थे और इसी वजह से वह खुद को PMO से जुड़ा हुआ समझता रहा.

हालांकि, पुलिस अब पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है. जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रोहन का PMO से वास्तव में कोई संबंध था या नहीं, कथित दस्तावेज किसने तैयार किए, तरुण कपूर कौन है और इस पूरे घटनाक्रम में रोहन के साथ मौजूद दोनों आरोपियों की क्या भूमिका थी.

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