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इस जेल के आगे तो जन्नत भी फेल ! सोशल मीडिया पर वायरल हुआ स्वीडन की जेल का वीडियो, लोग बोले - 'ये तो 5 स्टार होटल है...' 

इस जेल के आगे तो जन्नत भी फेल ! सोशल मीडिया पर वायरल हुआ स्वीडन की जेल का वीडियो, लोग बोले - 'ये तो 5 स्टार होटल है...' 

ज़रा एक ऐसी जेल की कल्पना कीजिए, जहाँ सज़ा के नाम पर आपको एक शानदार कमरा, आरामदायक बिस्तर, अपना निजी बाथरूम और पढ़ाई के लिए एक शांत कोना दिया जाता है। सुनने में यह किसी वेकेशन रिज़ॉर्ट जैसा लगता है, है ना? फिर भी, स्वीडन की एक जेल का एक वीडियो आजकल इंटरनेट पर धूम मचा रहा है। लोगों की प्रतिक्रिया ऐसी है कि भारतीय व्लॉगर गोपी कपाड़िया का यह वीडियो देखने के बाद लोग कह रहे हैं, "यार, वहाँ के कैदियों की हालत तो हमसे भी बेहतर है!" आइए, इस 'जन्नत जैसी' जेल के पीछे की पूरी कहानी जानते हैं।


ऐशो-आराम में जी रहे कैदी और इंटरनेट पर मचा हंगामा

जब भारतीय व्लॉगर गोपी कपाड़िया ने स्वीडन की एक जेल की झलक दिखाई, तो सोशल मीडिया पर कमेंट्स की बाढ़ आ गई। जेल के अंदर के नज़ारे किसी लग्ज़री पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन या किसी मॉडर्न हॉस्टल जैसे लगते हैं—न धूल, न सीलन और न ही भीड़भाड़। कमरे इतने साफ़-सुथरे और रोशनी से भरे हैं कि पहली नज़र में यह यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि वहाँ सच में अपराधी रहते हैं।

IIT और AIIMS से तुलना

जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, भारतीय यूज़र्स ने भारत के जाने-माने संस्थानों—जैसे IIT और AIIMS—के हॉस्टल्स की तुलना इस स्वीडिश जेल से करना शुरू कर दिया। लोगों का तर्क है कि जहाँ हमारे देश के सबसे होनहार छात्र अक्सर अच्छे कमरों और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते हैं, वहीं स्वीडन में अपराध करने वालों को 'शाही' सुख-सुविधाएँ दी जा रही हैं। कुछ यूज़र्स ने तो मज़ाक में यह भी कह दिया, "जब इतनी सारी सुख-सुविधाएँ मिल रही हैं, तो मेरा भी मन कर रहा है कि मैं भी वहाँ जाकर कोई छोटा-मोटा अपराध कर ही दूँ!"

भारतीय संस्थानों के हॉस्टल बनाम स्वीडिश जेलें

अब सवाल यह उठता है: आखिर स्वीडन अपने कैदियों के प्रति इतना मेहरबान क्यों है? असल में, स्वीडिश सिस्टम 'बदले' (retribution) में नहीं, बल्कि 'सुधार' (rehabilitation) में विश्वास रखता है। उनका फलसफ़ा यह है कि कैदियों के साथ सम्मान से—एक इंसान की तरह—पेश आने से, उनके समाज में एक बेहतर नागरिक के तौर पर लौटने की संभावना ज़्यादा होती है। दिलचस्प बात यह है कि साल 2005 में, सद्दाम हुसैन ने भी यहीं की किसी जेल में कैद होने की इच्छा ज़ाहिर की थी। स्वीडन की यही सोच उसे दुनिया के सबसे मानवीय और प्रगतिशील देशों की सूची में सबसे ऊपर रखती है। 

स्वीडन की जेल व्यवस्था और कैदियों का पुनर्वास

स्वीडन की एक जेल का यह वीडियो हमें इस बात पर सोचने के लिए मजबूर करता है कि क्या सज़ा का एकमात्र उद्देश्य केवल डर पैदा करना है, या फिर व्यक्ति में बदलाव लाना है। जहाँ भारत में जेलों की स्थिति को लेकर चल रही बहस निश्चित रूप से अपनी जगह सही है, वहीं स्वीडन का यह मॉडल दुनिया को 'मानवता' का एक अनोखा पाठ पढ़ा रहा है।

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