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भागलपुर में भावुक कर देने वाली घटना: 18 साल बाद घर लौटा लापता बेटा, अब 26 साल का युवक बनकर मिला परिवार से

भागलपुर में भावुक कर देने वाली घटना: 18 साल बाद घर लौटा लापता बेटा, अब 26 साल का युवक बनकर मिला परिवार से

बिहार के भागलपुर जिले से एक बेहद भावुक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को हैरान और भावुक कर दिया है। रंगरा थाना क्षेत्र के सधुआ दियारा गांव में 18 साल पहले लापता हुआ एक बच्चा अब एक युवा बनकर अपने परिवार से वापस मिल गया है।

यह कहानी हीरालाल सिंह के बेटे दिलखुश कुमार की है, जो करीब 18 साल पहले मात्र 8 वर्ष की उम्र में घर से लापता हो गया था। अब वह 26 साल का युवक बनकर अपने परिवार के सामने आया है। इस लंबे अंतराल के बाद बेटे की वापसी ने पूरे परिवार में खुशी और भावनाओं का सैलाब ला दिया है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना वर्ष 2005-06 के आसपास की है। उस समय दिलखुश कुमार किसी बात को लेकर अपने पिता की डांट से नाराज हो गया था। बचपन की मासूम नाराजगी में वह घर छोड़कर निकल गया और फिर वापस नहीं लौटा। परिवार ने उसे ढूंढने की हर संभव कोशिश की, रिश्तेदारों से लेकर आसपास के क्षेत्रों तक उसकी खोज की गई, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।

समय बीतता गया, उम्मीदें धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगीं, लेकिन परिवार के दिल में बेटे के लौटने की आश बनी रही। गांव में भी यह मामला लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। कई लोगों ने उसे मृत मान लिया था, तो कई लोग यह मानते थे कि शायद वह किसी अन्य राज्य या शहर में कहीं नया जीवन शुरू कर चुका होगा।

इसी बीच वर्षों बाद अचानक दिलखुश कुमार के लौटने की खबर ने सभी को चौंका दिया। बताया जा रहा है कि वह अब एक परिपक्व युवक बन चुका है और लंबे समय बाद अपने पुराने गांव और घर पहुंचा। जैसे ही उसने अपने परिवार से संपर्क किया, पूरे घर में खुशी और भावुकता का माहौल बन गया।

परिवार के सदस्यों के लिए यह क्षण किसी सपने से कम नहीं था। जिस बेटे को उन्होंने बचपन में खो दिया था, उसे अब एक वयस्क के रूप में सामने देखना उनके लिए बेहद भावनात्मक अनुभव था। मां की आंखों में वर्षों बाद बेटे को देखकर आंसू नहीं थम रहे थे, वहीं पिता भी अपने बेटे को गले लगाकर भावुक हो उठे।

गांव के लोग भी इस अनोखी वापसी से हैरान हैं और बड़ी संख्या में लोग परिवार से मिलने पहुंच रहे हैं। हर कोई इस कहानी को एक चमत्कार की तरह देख रहा है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इतने वर्षों तक दिलखुश कुमार कहां और किस हालात में रहा, लेकिन उसकी वापसी ने एक बार फिर यह साबित किया है कि अपनों से बिछड़ने के बाद भी रिश्तों की डोर कभी पूरी तरह टूटती नहीं है।

यह घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और लोग इसे भावनात्मक पुनर्मिलन की एक अनोखी मिसाल बता रहे हैं।

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