चुनाव आयोग ने 6 राज्यों में वोटर लिस्ट रिवीजन का शेड्यूल बदला: महाराष्ट्र समेत 5 राज्यों में 30 नवंबर को आएगी फाइनल लिस्ट, वीडियो में जाने दिल्ली में 22 दिसंबर को होगा प्रकाशन
चुनाव आयोग ने छह राज्यों में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का कार्यक्रम बदल दिया है। आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में मतदाताओं को वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने, नाम कटवाने या किसी तरह की गड़बड़ी को लेकर दावा-आपत्ति दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय दिया है। वहीं, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नगालैंड में नोटिस के निपटारे की समयसीमा बढ़ा दी गई है।नए कार्यक्रम के मुताबिक, महाराष्ट्र समेत पांच राज्यों में फाइनल वोटर लिस्ट 30 नवंबर को जारी की जाएगी। वहीं, दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 22 दिसंबर को होगा। चुनाव आयोग के इस फैसले से उन मतदाताओं को राहत मिलेगी, जिन्हें वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाने या किसी गलती को ठीक कराने के लिए पहले कम समय मिल रहा था।
दिल्ली और महाराष्ट्र के मतदाताओं को मिला अतिरिक्त समय
चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में मतदाता सूची से संबंधित दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए समय बढ़ाया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची में नाम शामिल कराने से वंचित न रह जाए। इसके साथ ही मतदाता अपने नाम, पते और अन्य जानकारियों में मौजूद गलतियों को ठीक कराने के लिए भी आवेदन कर सकेंगे।SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची की जांच की जाती है। इसमें पात्र मतदाताओं के नाम शामिल करने के साथ अपात्र और मृत मतदाताओं के नाम हटाने तथा दोहरी प्रविष्टियों जैसी गड़बड़ियों को ठीक करने का काम किया जाता है।
चार राज्यों में नोटिस के निपटारे की तारीख बढ़ी
आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नगालैंड में चुनाव आयोग ने नोटिस के निपटारे के लिए अतिरिक्त समय दिया है। इससे संबंधित अधिकारियों को मतदाताओं की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों और दावों की जांच करने का अधिक समय मिलेगा।आयोग की ओर से जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, पांच राज्यों में अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को प्रकाशित होगी। दिल्ली में यह प्रक्रिया कुछ अधिक समय तक चलेगी और वहां फाइनल वोटर लिस्ट 22 दिसंबर को जारी की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बदला कार्यक्रम
चुनाव आयोग का यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद आया है। 28 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से सवाल किया था कि जिन राज्यों में फिलहाल चुनाव नहीं होने हैं, वहां मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया इतनी जल्दबाजी में क्यों पूरी की जा रही है।कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया था कि मतदाता सूची से छूटे हुए लोगों को अपने नाम शामिल कराने के लिए पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। साथ ही दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए, ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से छूटने की आशंका कम हो सके।
पात्र मतदाताओं के लिए जरूरी है दावा-आपत्ति
SIR के दौरान मतदाताओं को अपनी जानकारी की जांच करने और किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर संबंधित अधिकारियों के सामने दावा या आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया जाता है। ऐसे में आयोग की ओर से समयसीमा बढ़ाने के फैसले को मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।अब संशोधित कार्यक्रम के तहत संबंधित राज्यों में मतदाता सूची की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंतिम सूची जारी होने से पहले दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा। इससे मतदाताओं को अपनी जानकारी सही कराने और सूची में नाम सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।

