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एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, संतों ने बताया धर्म-दर्शन का विस्तार

एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, संतों ने बताया धर्म-दर्शन का विस्तार
एकात्म धाम में पंचायतन मंदिर का शिलान्यास, संतों ने बताया धर्म-दर्शन का विस्तार

खंडवा, 27 अगस्त (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर में एकात्म धाम प्रकल्प के तहत पंचायतन मंदिर के निर्माण की दिशा में मुख्यमंत्री द्वारा पंचायतन मंदिर का शिलान्यास और शिला पूजन किया गया। इस अवसर पर संतों ने इसे धर्म, दर्शन और भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर विवेकानंद पुरी महाराज ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि संतों के चरण जहां पड़ते हैं, वह स्थान तीर्थ बन जाता है। ओंकारेश्वर भगवान आद्य गुरु शंकराचार्य की दीक्षा भूमि है। यहां पहले भूमि पूजन हो चुका है और इसके बाद आदि शंकराचार्य की मूर्ति की स्थापना भी की गई। अब पंचायतन मंदिर के शिला पूजन के साथ प्रकल्प का अगला चरण पूरा हुआ है।

उन्होंने कहा कि ओंकार पर्वत पहले भी अनेक मंदिरों से सुशोभित रहा है। यहां गौरी सोमनाथ और चौरासी खंभे जैसे प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद हैं। समय और परिस्थितियों के संयोग से अब आदि शंकराचार्य की परंपरा के साथ पंचायतन मंदिर की स्थापना हो रही है। यह केवल एक मंदिर निर्माण का कार्य नहीं, बल्कि ऐसा प्रकल्प है जो भविष्य में पूरे विश्व को भारतीय आध्यात्मिक दर्शन और ‘सबको साथ लेकर चलने’ के सिद्धांत का मार्गदर्शन करेगा।

एकात्म धाम ओंकारेश्वर के आवासीय आचार्य स्वामी भूमनंद सरस्वती ने बताया कि पंचायतन मंदिर पंचमहाभूतों और पंचदेव उपासना की अवधारणा को समर्पित होगा। उन्होंने कहा कि पंचमहाभूतों से ही समस्त सृष्टि की रचना मानी गई है और पंचदेव उपासना के माध्यम से भगवान के विराट स्वरूप की आराधना की जाएगी।

उन्होंने बताया कि यह शिव पंचायतन मंदिर होगा। इसके मध्य में भगवान शिव मुख्य विग्रह के रूप में विराजमान होंगे, जबकि चारों दिशाओं/कोनों में अन्य देवताओं के मंदिर होंगे। इनमें शक्ति, गणेश, सूर्य और विष्णु की उपासना शामिल है। इस प्रकार मंदिर में विभिन्न उपासना परंपराओं के समन्वय और सम्मान का संदेश दिया जाएगा।

स्वामी भूमनंद सरस्वती ने बताया कि मंदिर का निर्माण उसी बलुआ पत्थर से किया जाएगा, जिसका उपयोग अयोध्या के राम मंदिर के निर्माण में हुआ है। मंदिर का मुख्य ढांचा अपेक्षाकृत जल्द तैयार हो सकता है, लेकिन पूरे प्रकल्प को पूरा होने में करीब ढाई से तीन वर्ष का समय लगने का अनुमान है। पंचायतन मंदिर समेत अलग-अलग निर्माण कार्यों के माध्यम से एकात्म धाम प्रकल्प को गति दी जाएगी।

संतों ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने अपने समय में विभिन्न संप्रदायों और उपासना पद्धतियों को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया था। पंचायतन मंदिर उसी समन्वय और एकात्मता की भावना को आधुनिक समय में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण केंद्र बनने की उम्मीद है।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम

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