ईंधन की बढ़ती कीमतों का असर: एयर एंडिया के बाद अब इंडिगो की घरेलू उड़ानों में कटौती
नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। ईंधन के दामों में हुई बढ़ोतरी का असर अब घरेलू स्तर पर दिखाई देना शुरू हो गया है। पेट्रोल-डीजल के साथ ही जेट फ्यूल के भाव में आई तेजी के कारण एयर इंडिया और इंडिगो ने घरेलू उड़ानों में कटौती का फैसला लिया है।
दरअसल, इंडिगो जून से अगस्त 2026 के बीच अपनी घरेलू उड़ानों की क्षमता में 5-7 प्रतिशत की कटौती करने जा रही है। एयर इंडिया के बाद, इंडिगो दूसरी प्रमुख भारतीय एयरलाइन है जो परिचालन में कटौती कर रही है। अस्थायी शेड्यूल समायोजन के तहत एयरलाइन ने पहले ही अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की क्षमता में लगभग 17 प्रतिशत की कटौती कर दी है। यह कदम एयर इंडिया द्वारा जून और जुलाई के दौरान घरेलू उड़ानों में 22 प्रतिशत की कटौती की घोषणा के तुरंत बाद उठाया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विमानन ईंधन की कीमतों में तेज वृद्धि एयरलाइन परिचालन को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों में से एक है। जेट फ्यूल एयरलाइन के परिचालन खर्च का लगभग एक चौथाई हिस्सा होता है, जिससे एयरलाइनें कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती हैं।
ईरान में चल रहे संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है, जिससे हाल के महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए घरेलू एयरलाइंस बढ़ती ईंधन लागत से विशेष रूप से प्रभावित हुई हैं। रुपए के कमजोर होने से भी एयरलाइंस पर लागत का बोझ बढ़ गया है।
साथ ही, आमतौर पर गर्मियों की छुट्टियों के चरम मौसम के बाद यात्रियों की मांग में कमी देखी जाती है।
विश्लेषकों का कहना है कि मांग में कमी और ईंधन की बढ़ती लागत के संयुक्त प्रभाव ने एयरलाइंस को अपनी क्षमता योजनाओं को फिर से समायोजित करने के लिए मजबूर किया है।
इससे पहले एयर इंडिया ने बुधवार को एक बयान में कहा कि मध्य पूर्व संघर्ष के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच घाटे में चल रही एयरलाइन लागत कम करने के लिए संघर्ष कर रही है, जिसके चलते उसने जून से अगस्त के बीच कुछ घरेलू मार्गों पर उड़ानों की संख्या कम कर दी है।
टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन ने बयान में कहा कि यह कदम कुछ अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को कम करने के अपने पूर्व निर्णय के बाद उठाया गया है।
बयान में कहा गया है कि जून से अगस्त 2026 के बीच चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय सेवाओं में पहले से घोषित समायोजन के क्रम में, हमने इसी अवधि के दौरान कुछ घरेलू मार्गों पर अस्थायी रूप से परिचालन को तर्कसंगत बनाया है, साथ ही चुनिंदा मार्गों पर उड़ानों की संख्या में कमी की है।
घाटे को कम करने के दबाव में चल रही एयर इंडिया को लगभग 20 प्रतिशत घरेलू उड़ानें रद्द करने की उम्मीद है, जिससे ईंधन की खपत कम होगी, जो परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत है।
--आईएएनएस
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