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पृथ्वी दिवस पर मिसाल बना ये दंपति, घर में लगाए डेढ़ हजार पौधे

सिवनी, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। आज पूरी दुनिया में पृथ्वी दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन का मकसद लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इस कड़ी में मध्य प्रदेश के सिवनी जिले का एक दंपति अपनी अनोखी पहल से लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है। दरअसल, आज के समय में शहरों में रहने वाले लोग जगह की कमी का बहाना बनाकर पेड़-पौधे लगाने से बचते हैं। वहीं सिवनी के हरिदर्शन कॉलोनी में रहने वाले नीरज कुमार चौरिया और उनकी पत्नी इंद्रप्रभा चौरिया ने अपने छोटे से घर में भी प्रकृति को बसा दिया है।
पृथ्वी दिवस पर मिसाल बना ये दंपति, घर में लगाए डेढ़ हजार पौधे

सिवनी, 22 अप्रैल (आईएएनएस)। आज पूरी दुनिया में पृथ्वी दिवस मनाया जा रहा है। इस दिन का मकसद लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इस कड़ी में मध्य प्रदेश के सिवनी जिले का एक दंपति अपनी अनोखी पहल से लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है। दरअसल, आज के समय में शहरों में रहने वाले लोग जगह की कमी का बहाना बनाकर पेड़-पौधे लगाने से बचते हैं। वहीं सिवनी के हरिदर्शन कॉलोनी में रहने वाले नीरज कुमार चौरिया और उनकी पत्नी इंद्रप्रभा चौरिया ने अपने छोटे से घर में भी प्रकृति को बसा दिया है।

इस दंपति ने अपने घर में करीब 1200 से 1400 पौधे लगाए हैं। इन पौधों में अलग-अलग तरह के कैक्टस, बोनसाई और सजावटी पौधे शामिल हैं।

प्लांट लवर इंद्रप्रभा चौरिया ने कहा, ''मुझे बचपन से ही पेड़-पौधों का बहुत शौक था। साल 2020 में मेरी शादी नीरज चौरिया से हुई। शादी के बाद मैंने देखा कि नीरज भी पौधों से बेहद लगाव रखते हैं। उन्होंने घर में पहले से ही कुछ पौधे लगाए हुए थे। शादी के बाद मैंने भी कई नए पौधे लगाए और उनकी देखभाल शुरू की।''

उन्होंने कहा, ''मैंने खास तौर पर बोनसाई तैयार करने पर मेहनत की। एक अच्छा बोनसाई तैयार करने में एक से डेढ़ साल तक का समय लग जाता है।''

इंद्रप्रभा ने पेड़-पौधों को लेकर लोगों की सोच पर भी बात की। उन्होंने कहा, ''कई लोग मानते हैं कि कैक्टस समेत कई दूसरे पौधों को घर में लगाना अशुभ होता है लेकिन यह सिर्फ एक भ्रम है। मेरा मानना है कि कोई भी पेड़-पौधा अशुभ नहीं होता बल्कि ये घर की सुंदरता बढ़ाते हैं।''

वहीं, नीरज कुमार चौरिया ने कहा, "मुझे पेड़-पौधे लगाने का शौक बचपन से ही था। मेरे माता-पिता भी पौधों से बहुत प्यार करते थे और घर में कई पौधे लगाए करते थे। कोरोना काल के दौरान मेरी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। मैं उस समय बेंगलुरु में काम करता था लेकिन लॉकडाउन के दौरान वापस अपने घर सिवनी लौट आया। वर्क फ्रॉम होम के दौरान मुझे काफी समय मिला और मैंने अपने इस शौक को फिर से जीना शुरू किया।"

नीरज ने कहा, ''शुरुआत में मैंने ऐसे पौधों की तलाश की, जिन्हें कम जगह और कम देखभाल की जरूरत हो। इसी दौरान मेरी रुचि कैक्टस और दूसरे ऐसे पौधों में बढ़ी, जो अपनी पत्तियों में पानी जमा करके लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। धीरे-धीरे मैंने अलग-अलग प्रजातियों के कैक्टस इकट्ठा करना शुरू किया। आज मेरे घर का हर कोना हरियाली से भरा है।''

नीरज ने कहा, ''पेड़-पौधों की देखभाल करना उतना मुश्किल नहीं है, जितना लोग समझते हैं। सही जानकारी और थोड़ी मेहनत से कोई भी अपने घर में पेड़-पौधे लगा सकता है। मेरी पत्नी ने एग्रीकल्चर की पढ़ाई की हुई है, जिससे मुझे पौधों की देखभाल और नई प्रजातियों के बारे में काफी जानकारी मिली। हम दोनों मिलकर हर दिन पौधों की देखभाल करते हैं।''

--आईएएनएस

पीके/पीएम

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