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भारत में जल्द दौड़ेंगी E100 फ्यूल वाली कारें, न पेट्रोल की जरूरत और न डीजल की; वीडियो में जानें क्या है सरकार का नया नियम

भारत में जल्द दौड़ेंगी E100 फ्यूल वाली कारें, न पेट्रोल की जरूरत और न डीजल की; वीडियो में जानें क्या है सरकार का नया नियम

भारत में आने वाले समय में ऐसी कारें सड़कों पर दौड़ती नजर आ सकती हैं, जिन्हें चलाने के लिए पेट्रोल, डीजल या CNG की जरूरत नहीं होगी। खास बात यह है कि इन गाड़ियों में इलेक्ट्रिक कारों की तरह बैटरी से चलने वाली तकनीक भी जरूरी नहीं होगी। केंद्र सरकार ने 100 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल यानी E100 के इस्तेमाल को मंजूरी देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इससे देश में वैकल्पिकईंधन से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस ईंधन का इस्तेमाल केवल उन्हीं वाहनों में किया जा सकेगा, जिन्हें खास तौर पर E100 पर चलने के लिए डिजाइन किया गया है।

सरकार के नए नियमों से E100 फ्यूल पर चलने वाली गाड़ियों की टेस्टिंग और उन्हें सड़क पर चलाने की मंजूरी मिलने का रास्ता साफ हुआ है। इससे वाहन कंपनियों के लिए नई तकनीक विकसित करने और उसके परीक्षण की प्रक्रिया आसान हो सकती है। आने वाले समय में इसका असर ऑटोमोबाइल सेक्टर पर भी देखने को मिल सकता है।

क्या है E100 फ्यूल और कैसे तैयार होता है?


E100 का मतलब 100 प्रतिशत एथेनॉल ईंधन है। यह एक तरह का जैव ईंधन यानी बायोफ्यूल है, जिसे मुख्य रूप से गन्ने, मक्का और अन्य जैविक स्रोतों से तैयार किया जाता है। सामान्य पेट्रोल में एथेनॉल की कुछ मात्रा मिलाई जाती है, लेकिन E100 में पेट्रोल की मिलावट नहीं होती।एथेनॉल को पेट्रोल और डीजल जैसे पारंपरिक ईंधनों के विकल्प के तौर पर देखा जाता है। भारत में पहले से ही पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की प्रक्रिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, घरेलू स्तर पर ईंधन का उत्पादन बढ़ाना और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करना है।हालांकि, E100 का इस्तेमाल करने के लिए वाहन का इंजन और ईंधन प्रणाली इस तरह तैयार होनी चाहिए कि वह शुद्ध एथेनॉल पर काम कर सके। सामान्य पेट्रोल कार में सीधे E100 डालकर चलाना सुरक्षित या उपयुक्त नहीं माना जा सकता।

मौजूदा कार मालिकों को क्या करना होगा?

सरकार के इस फैसले से मौजूदा पेट्रोल और डीजल कार मालिकों को अपनी गाड़ियों में तुरंत कोई बदलाव कराने की जरूरत नहीं है। जिन लोगों के पास अभी सामान्य पेट्रोल या डीजल से चलने वाली कारें हैं, वे पहले की तरह उनका इस्तेमाल कर सकेंगे।उन्हें अपनी गाड़ी को E85 या E100 ईंधन पर चलाने के लिए शिफ्ट करने या इंजन में किसी तरह का मॉडिफिकेशन कराने की आवश्यकता नहीं है। E100 का इस्तेमाल केवल उन वाहनों में किया जा सकेगा, जिन्हें निर्माता कंपनी ने इस ईंधन के अनुकूल बनाया है।इसलिए नई तकनीक अपनाने से पहले वाहन की ईंधन संबंधी क्षमता और कंपनी की ओर से जारी दिशा-निर्देशों को समझना जरूरी होगा।

अमेरिका और ब्राजील में पहले से इस्तेमाल हो रही तकनीक

एथेनॉल आधारित ईंधन का इस्तेमाल दुनिया के कई देशों में किया जा रहा है। अमेरिका और ब्राजील में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वाले वाहनों का उपयोग काफी समय से हो रहा है। ऐसी गाड़ियों को अलग-अलग अनुपात में एथेनॉल और पेट्रोल के मिश्रण पर चलाने के लिए डिजाइन किया जाता है। हालांकि, हर फ्लेक्स-फ्यूल वाहन का E100 पर चलना जरूरी नहीं है।भारत में भी इस तकनीक को बढ़ावा मिलने से वाहन उद्योग को नए विकल्प मिल सकते हैं। साथ ही, गन्ना और मक्का जैसे कृषि उत्पादों से एथेनॉल बनाने वाले उद्योगों को भी फायदा मिलने की संभावना है।

क्या इससे पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी?

E100 जैसे वैकल्पिक ईंधन का विस्तार होने से भारत को कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे घरेलू स्तर पर उत्पादित ईंधन की मांग बढ़ सकती है और किसानों के लिए भी नए आर्थिक अवसर पैदा हो सकते हैं।हालांकि, इसका वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि E100 वाहनों कीकीमत कितनी होगी, ईंधन कितनी आसानी से उपलब्ध होगा और इसका इस्तेमाल कितना किफायती साबित होगा। फिलहाल, सरकार के इस कदम को भारत में वैकल्पिक ईंधन और नई वाहन तकनीक को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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