जब एक जनरल ने सत्ता को चेताया! आइजनहावर का विदाई भाषण और ‘मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स’ का सच
नई दिल्ली, 17 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइजनहावर ने जब राष्ट्र के नाम अपना विदाई भाषण दिया, तब बहुत कम लोगों को अंदाजा था कि यह भाषण आने वाले दशकों की अमेरिकी और वैश्विक राजनीति को समझने की एक कुंजी बन जाएगा। एक ऐसे समय में, जब शीत युद्ध अपने चरम पर था और सैन्य शक्ति को राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक माना जा रहा था, आइजनहावर ने जनता को एक असहज लेकिन जरूरी सच से रूबरू कराया।
17 जनवरी 1961 को अपने संबोधन के जरिए उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका में सेना, हथियार उद्योग और राजनीतिक सत्ता के बीच एक ऐसा गठजोड़ उभर चुका है, जो लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकता है। इसी चेतावनी को उन्होंने “मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स” नाम दिया।
इस ऐतिहासिक क्षण की गहराई को इतिहासकार जेम्स लेडबेटर अपनी पुस्तक 'अनवॉरेंटेड इंफ्लुएंस: ड्वाइट डी. आइजनहावर एंड द मिलिट्री-इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स' में विस्तार से समझाते हैं। यह किताब बताती है कि आइजनहावर की चेतावनी अचानक नहीं थी, बल्कि उनके लंबे सैन्य और राजनीतिक अनुभव का निचोड़ थी। द्वितीय विश्व युद्ध के नायक और पांच-सितारा जनरल रहे आइजनहावर भली-भांति जानते थे कि सैन्य शक्ति कितनी आवश्यक है, लेकिन यह भी समझते थे कि जब वही शक्ति व्यापार और राजनीति से जुड़ जाए, तो उसके परिणाम खतरनाक हो सकते हैं।
अपने विदाई भाषण में आइजनहावर ने कहा कि युद्ध के बाद अमेरिका में एक स्थायी हथियार उद्योग खड़ा हो गया है। पहले युद्ध खत्म होने के साथ सेनाएं और उत्पादन कम हो जाते थे, लेकिन अब हथियारों का निर्माण एक निरंतर व्यवसाय बन चुका था। लेडबेटर के अनुसार, आइजनहावर को डर था कि रक्षा कंपनियां अपने आर्थिक हितों के लिए सरकार की नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं और देश को ऐसे संघर्षों में धकेल सकती हैं, जिनकी वास्तविक आवश्यकता न हो।
यह चेतावनी इसलिए भी असाधारण थी क्योंकि यह किसी शांतिवादी या विपक्षी नेता ने नहीं, बल्कि अमेरिका के सर्वोच्च सैन्य अनुभव वाले राष्ट्रपति ने दी थी। आइजनहावर ने साफ कहा कि लोकतंत्र तभी सुरक्षित रह सकता है, जब जागरूक नागरिक, स्वतंत्र प्रेस और जिम्मेदार संसद इस शक्ति संतुलन पर निगरानी रखें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास पर सरकारी नियंत्रण कमजोर पड़ सकता है, यदि वह केवल सैन्य हितों के अधीन हो जाए।
अनवॉरेंटेड इंफ्लूएंस ये भी बताता है कि उस समय इस भाषण को जितनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए था, उतनी नहीं ली गई। इसके बाद के वर्षों में वियतनाम युद्ध, हथियारों की दौड़ और वैश्विक सैन्य हस्तक्षेपों ने आइजनहावर की आशंकाओं को और अधिक प्रासंगिक बना दिया। आज, जब रक्षा उद्योग, टेक्नोलॉजी और राजनीति का रिश्ता पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुका है, आइजनहावर का यह भाषण इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान की चेतावनी जैसा प्रतीत होता है।
--आईएएनएस
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