Samachar Nama
×

डूसू चुनाव से पहले 'बदलो डीयू, बदलो डूसू' मार्च की घोषणा, नेहा बोरा ने भी की शिरकत

डूसू चुनाव से पहले 'बदलो डीयू, बदलो डूसू' मार्च की घोषणा, नेहा बोरा ने भी की शिरकत
डूसू चुनाव से पहले 'बदलो डीयू, बदलो डूसू' मार्च की घोषणा, नेहा बोरा ने भी की शिरकत

नई दिल्ली, 3 सितंबर (आईएएनएल)। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव से पहले छात्रों के मुद्दों को उठाने और उन्हें एकजुट करने के लिए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसआई) के उम्मीदवार अनन्या और अक्षत ने दिल्ली यूनिवर्सिटी में ‘बदलो डीयू, बदलो डूसू’ मार्च की घोषणा की।

अनन्या ने बुधवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि इवेंट में एआईएसआई की नेशनल प्रेसिडेंट नेहा बोरा ने शिरकत की। उन्होंने सीजीपी प्रदर्शन पर कहा कि जंतर-मंतर पर जो ऐतिहासिक आंदोलन हुआ, उसकी वजह से आज जेन-जी यहां मौजूद है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान तो बस झांकी है, अभी एबीवीपी बाकी है।

अनन्या ने कहा कि केवल एक धर्मेंद्र प्रधान को निकाल देने से कुछ नहीं होगा। अभी हजारों धर्मेंद्र प्रधान दिल्ली विश्वविद्यालय को जकड़े हुए हैं, जो हमारे भविष्य को निगलने के लिए तैयार बैठे हैं। उन्होंने कहा कि डीयू में जो छात्र आते हैं, वे यहां पर सपने लेकर आते हैं, लेकिन यहां रहने के लिए हॉस्टल नहीं है। यूजीसी की गाइडलाइन में साफ-साफ लिखा है कि कम से कम 60 प्रतिशत छात्रों को हॉस्टल मिलना चाहिए। कहां गया वह हॉस्टल? प्रत्येक वर्ष फीस बढ़ जाती है। हम देखते हैं कि डूसू आता है तो थार और डिफेंडर की कतारें लग जाती हैं। काफिले लग जाते हैं। आर्ट्स फैकल्टी की सड़कें धुंधली दिखने लगती हैं। इतने मुश्किल हालात में डीयू के स्टूडेंट्स जैसे-तैसे करके वोट डालने के लिए आते हैं।

अक्षत ने कहा कि गुरुवार को हमने एक कार्यक्रम आयोजित किया है, जिसमें हमारी नेशनल प्रेसिडेंट नेहा बोरा शामिल हुई। इस दौरान हमने उन तमाम मुद्दों पर बात की जो दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ रहे छात्रों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। उन्होंने कहा कि हॉस्टल न मिल पाने के कारण छात्रों को महंगे पीजी में रहना पड़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार से मेट्रो कन्वेंशनल पास को लेकर ये सारी यूनियन वादा करती हैं, लेकिन कोई एक्शन नहीं लेती। इसको लेकर एक्शन और लड़ाई होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि एआईएसआई एकमात्र ऐसी एसोसिएशन है, जिसने 2018 में लड़ाई लड़ी, जिसका परिणाम है कि आज की तारीख में डीटीसी कन्वेंशनल पास मान्य है।

इसके अतिरिक्त, योग फिट इंडिया जैसे कोर्स को हमारी मुख्य डिग्री को कमजोर किया जा रहा है। हम इस चीज के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि गुंडों ने डीयू के कैंपस की राजनीति को थार, रेंज रोवर, पिज्जा और बर्गर तक समेट दिया है। यह लड़ाई इन तमाम मुद्दों के साथ छात्रों से महंगी फीस लेकर उनके साथ की जा रही धोखाधड़ी को लेकर है।

उन्होंने कहा कि कई संस्थानों में एक वर्ष में 45 प्रतिशत फीस में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में छात्र कैसे इस फीस को वहन करेंगे। अगर सरकारी संस्थानों की फीस में ही इतनी बढ़ोतरी होगी, तो छात्र कहां से पढ़ाई कर सकेंगे। अक्षत ने आगे बताया कि उन्होंने बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में एक केस दायर किया, जिसमें उन्होंने इस चीज को हटाने की याचिका डाली कि जब भी कोई छात्र चुनाव लड़ना चाहता है तो उसे अपने माता-पिता की सहमति चाहिए होती है। उन्होंने इसी को हटाने की मांग की।

--आईएएनएस

डीके/डीकेपी

Share this story