Dussehra 2026 Special : दशहरे पर देशभर में रावण दहन की धूम! पंचकूला में 221 फीट का विशाल पुतला, दिल्ली में जलेगा 30 फीट का कॉकरोच
देशभर में आज 20 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व उत्साह और धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। जगह-जगह रामलीला के मंचन, शोभायात्राओं और रावण दहन की तैयारियां की गई हैं। इस बार दशहरे पर विशालकाय रावण के पुतले लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। हरियाणा के पंचकूला में 221 फीट ऊंचे रावण का दहन किया जाएगा, जबकि उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 181 फीट ऊंचा पुतला तैयार किया गया है। दूसरी ओर, दिल्ली में रावण के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच का पुतला जलाने की तैयारी भी चर्चा में है।देश के अलग-अलग शहरों में रावण के पुतलों का आकार, डिजाइन और दहन का तरीका इस बार खास आकर्षण बना हुआ है। कहीं आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो कहीं पारंपरिक रामलीला और धार्मिक आयोजनों के जरिए बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जा रहा है।
पंचकूला में 221 फीट ऊंचा रावण बनेगा सबसे बड़ा आकर्षण
हरियाणा के पंचकूला में इस साल दशहरा समारोह का मुख्य आकर्षण 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला है। सेक्टर-5 स्थित शालीमार ग्राउंड में इसे तैयार किया गया है। आयोजकों के मुताबिक, इस विशाल पुतले को बनाने में करीब 34 से 35 लाख रुपये खर्च हुए हैं। इसकी ऊंचाई के कारण इसे देश के सबसे ऊंचे रावण के पुतलों में शामिल किया जा रहा है।
पुतले के दहन को खास बनाने के लिए तकनीक और आतिशबाजी का इस्तेमाल करने की योजना है। आयोजन स्थल पर लोगों की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। प्रशासन और पुलिस की ओर से भीड़ नियंत्रण और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
देहरादून में 181 फीट ऊंचे रावण का दहन
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी दशहरे को लेकर खास तैयारियां की गई हैं। यहां परेड ग्राउंड में बन्नू बिरादरी दशहरा कमेटी की ओर से आयोजित समारोह में 181 फीट ऊंचा रावण का पुतला आकर्षण का केंद्र रहेगा। रिपोर्टों के मुताबिक, इसे तैयार करने में लगभग 21 लाख रुपये की लागत आई है और पुतले का दहन रिमोट कंट्रोल के जरिए किए जाने की व्यवस्था है।
इतने विशाल पुतले को देखने के लिए हर साल बड़ी संख्या में लोग दशहरा समारोह में पहुंचते हैं। रावण दहन के साथ रामलीला और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी इस पर्व की रौनक बढ़ाते हैं।
दिल्ली में रावण के साथ जलेगा 30 फीट ऊंचा कॉकरोच
दिल्ली में इस बार रावण दहन के साथ 30 फीट ऊंचे कॉकरोच के पुतले की चर्चा भी हो रही है। इस तरह के अनोखे पुतले दशहरा आयोजनों को अलग पहचान देते हैं और लोगों के बीच उत्सुकता पैदा करते हैं।
दिल्ली में विभिन्न इलाकों में रामलीला और रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। राजौरी गार्डन से टैगोर गार्डन तक कई जगह रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले भी तैयार किए गए हैं। हालांकि, कॉकरोच के पुतले वाले कार्यक्रम का सटीक आयोजन स्थल और समय स्थानीय आयोजकों से जांचना उचित होगा।
इन शहरों में भी जलेंगे विशालकाय रावण के पुतले
दशहरे पर देश के कई अन्य शहरों में भी बड़े आकार के पुतले तैयार किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रमुख शहरों में पुतलों की ऊंचाई इस प्रकार बताई गई है:
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इंदौर: 111 फीट
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कोटा: 105 फीट
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भोपाल: 105 फीट
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रायपुर: 101 फीट
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उज्जैन: 101 फीट
इन शहरों में रावण दहन के साथ मेलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आतिशबाजी के आयोजन भी लोगों को आकर्षित करते हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी इस बार 120 फीट ऊंचा रावण तैयार किया गया है, जो विद्याधर नगर के दशहरा समारोह का प्रमुख आकर्षण है।
राजस्थान के कपासन में आंधी से गिरा 71 फीट ऊंचा रावण
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन में दशहरे से पहले मौसम ने आयोजकों की परेशानी बढ़ा दी। तेज आंधी के कारण 71 फीट ऊंचा रावण का पुतला गिर गया। इस घटना से आयोजन की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका है।
ऐसे बड़े पुतलों को खड़ा करने के लिए मजबूत ढांचे और सुरक्षा इंतजामों की जरूरत होती है। तेज हवा और खराब मौसम के दौरान पुतलों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए आयोजकों को मौसम की स्थिति और आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखना जरूरी है।
रावण दहन की परंपरा कितनी पुरानी है?
भारत में दशहरे पर रावण दहन की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम ने इसी दिन लंकापति रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत स्थापित की थी। इसी विजय की याद में विजयादशमी मनाई जाती है और कई स्थानों पर रावण, कुंभकर्ण तथा मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है।
रामलीला के मंचन के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन, संघर्ष और रावण पर विजय की कथा दिखाई जाती है। दशहरे का पर्व केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक परंपराओं और सामुदायिक मेल-जोल का भी प्रतीक है।
वाराणसी की रामलीला का इतिहास भी है खास
रामलीला की परंपरा के इतिहास को लेकर यह मान्यता प्रचलित है कि 16वीं या 17वीं शताब्दी में तुलसीदास के शिष्य मेघा भगत ने वाराणसी में रामलीला की शुरुआत की थी। हालांकि, इस परंपरा के शुरुआती इतिहास और उसके स्वरूप को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक विवरण मिलते हैं।बताया जाता है कि ब्रिटिश कलाकार जेम्स प्रिन्सेप ने 1834 में एक चित्र बनाया था, जिसमें रामनगर में बनारस के राजा के सामने रामलीला और रावण दहन का आयोजन दर्शाया गया है। यह चित्र रामलीला की ऐतिहासिक परंपरा को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
दशहरा क्यों मनाया जाता है?
दशहरा या विजयादशमी का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह पर्व संदेश देता है कि अहंकार, अन्याय और अधर्म चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः सत्य और धर्म की जीत होती है।रावण का पुतला जलाना इसी प्रतीकात्मक संदेश से जुड़ा है। कई जगहों पर इस दिन शस्त्र पूजा, शमी वृक्ष की पूजा और विशेष धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाते हैं। अलग-अलग राज्यों में दशहरा मनाने की परंपराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन बुराई पर अच्छाई की जीत इसका प्रमुख संदेश है।
आज शाम रावण दहन देखने जाने से पहले ध्यान रखें
दशहरे के अवसर पर बड़े आयोजनों में भारी भीड़ जुट सकती है। ऐसे में घर से निकलने से पहले आयोजन स्थल, रावण दहन के समय और यातायात संबंधी निर्देशों की जानकारी जरूर ले लें। बच्चों को भीड़ में अपने साथ रखें और पुतलों तथा आतिशबाजी से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।इस बार पंचकूला के 221 फीट ऊंचे रावण से लेकर देहरादून के 181 फीट के पुतले तक, देशभर में दशहरे के आयोजन खास आकर्षण बने हुए हैं। विशाल पुतलों और आधुनिक तकनीक के बीच त्योहार का मूल संदेश वही है—सत्य की जीत और बुराई का अंत।

