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दुर्गा पूजा के सरकारी विज्ञापन को लेकर टीएमसी का आरोप, 'सनातन संस्कृति की बात करने वाले देवी की छवि से कर रहे खिलवाड़'

दुर्गा पूजा के सरकारी विज्ञापन को लेकर टीएमसी का आरोप, 'सनातन संस्कृति की बात करने वाले देवी की छवि से कर रहे खिलवाड़'
दुर्गा पूजा के सरकारी विज्ञापन को लेकर टीएमसी का आरोप, 'सनातन संस्कृति की बात करने वाले देवी की छवि से कर रहे खिलवाड़'

कोलकाता, 7 सितंबर (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा को लेकर जारी एक सरकारी विज्ञापन में मां दुर्गा को 10 की जगह 11 हाथों के साथ दिखाए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष और सांसद डोला सेन ने इसे सनातन संस्कृति का अपमान बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। टीएमसी नेताओं ने कहा कि जो लोग तोड़-मरोड़ बर्दाश्त न करने की बात करते हैं, वे खुद ही देवी की छवि के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने कहा, "इस सरकारी कैंपेन में, दुर्गा पूजा मीटिंग को लेकर एक विज्ञापन आया था, और उस कैंपेन में, मां दुर्गा की तस्वीर पर 'दशभुजा' नाम लिखा है क्योंकि मां दुर्गा के दस हाथ हैं, लेकिन उस विज्ञापन में ग्यारह हाथ हो गए। ऐसा कैसे हुआ? वे सनातन संस्कृति की बात करते हैं, लेकिन यह देखिए, वे कहते हैं कि तोड़-मरोड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, फिर भी उन्होंने खुद ग्यारह हाथ दिखाकर उसे तोड़-मरोड़ दिया।"

एक अन्य सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, "हमें यह सब नहीं पता, हमें नहीं पता कि वह क्या कहना चाहते हैं या क्या करना चाहते हैं, लेकिन हर स्ट्रीम का महत्व और अहमियत है। अगर आप कुछ करना चाहते हैं, तो आपके नए प्रोग्राम में हर किसी की विशेषज्ञता को ठीक से रखना चाहिए, क्योंकि जब कोई बीमार होता है, तो हम एलोपैथिक ट्रीटमेंट, होम्योपैथिक ट्रीटमेंट, या आयुर्वेद कर सकते हैं, क्योंकि बहुत सारे विकल्प हैं। इलाज की सिर्फ एक लाइन नहीं होनी चाहिए, यह सिर्फ मेडिसिन नहीं होनी चाहिए, होम्योपैथी भी रहनी चाहिए, आप होम्योपैथी को मॉडर्न बना सकते हैं, लेकिन होम्योपैथी रहनी चाहिए, और आयुर्वेद रहनी चाहिए, क्योंकि इसका अपना महत्व है।"

तृणमूल कांग्रेस की सांसद डोला सेन ने विज्ञापन को लेकर कहा, "यह सिर्फ एक विज्ञापन नहीं है। यह एक सरकारी विज्ञापन है, जो बहुत बुरा है। जब देवी-देवताओं की मूर्तियों के बारे में ऐसी गलती हो जाए, जो कभी नहीं होनी चाहिए, तो कोई क्या कह सकता है। फिर भी ऐसा हो रहा है। पिछले 12 साल से केंद्र की सत्ता में होना ही इसका कारण है, जहां हमने देखा कि रूलिंग पार्टी के प्रमुख ने इसे यह कहकर सही भी ठहराया कि क्या गलत हुआ, इसे इतना सामान्य समझो, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए।"

टीएमसी सांसद सेन ने कहा, "समिक भट्टाचार्य के बारे में, हम किसी की बड़ाई नहीं करना चाहते, लेकिन भाजपा सत्ताधारी पार्टी है, और पार्टी संगठन और गवर्नेंस के बीच कुछ मतभेद और मनमुटाव हैं, जो उनकी अपनी अंदरूनी समस्या है। बार-बार यह देखा गया है कि जब भी सरकार कोई कार्रवाई करती है, तो पार्टी की तरफ से नाराजगी जाहिर की जाती है, और इस बार भी वही हो रहा है।"

--आईएएनएस

केके/एबीएम

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