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दुनिया में पहली बार ब्रॉड गेज ट्रैक पर दौड़ेगी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन, अहमदाबाद–धोलेरा कॉरिडोर को मिली मंजूरी

अहमदाबाद, 15 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गुजरात को देश का पहला ब्रॉड गेज सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रदान करते हुए अहमदाबाद (सरखेज)–धोलेरा सेमी हाई-स्पीड डबल लाइन रेलवे परियोजना को ऐतिहासिक मंजूरी प्रदान की है। लगभग 20,667 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना भारतीय रेलवे की पहली स्वदेशी तकनीक आधारित सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना होगी, जिस पर भविष्य में नमो भारत ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।
दुनिया में पहली बार ब्रॉड गेज ट्रैक पर दौड़ेगी सेमी हाई-स्पीड ट्रेन, अहमदाबाद–धोलेरा कॉरिडोर को मिली मंजूरी

अहमदाबाद, 15 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गुजरात को देश का पहला ब्रॉड गेज सेमी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रदान करते हुए अहमदाबाद (सरखेज)–धोलेरा सेमी हाई-स्पीड डबल लाइन रेलवे परियोजना को ऐतिहासिक मंजूरी प्रदान की है। लगभग 20,667 करोड़ की लागत वाली यह परियोजना भारतीय रेलवे की पहली स्वदेशी तकनीक आधारित सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना होगी, जिस पर भविष्य में नमो भारत ट्रेनों का संचालन किया जाएगा।

करीब 134 किलोमीटर लंबी यह नई दोहरी रेल लाइन अहमदाबाद, धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन, आगामी धोलेरा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा और लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर को अत्याधुनिक रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। परियोजना की डिजाइन गति 220 किमी प्रति घंटा और परिचालन गति 200 किमी प्रति घंटा निर्धारित की गई है। कॉरिडोर पर कुल 13 स्टेशन विकसित किए जाएंगे।

परियोजना के अंतर्गत 3 मेगा पुल, 74 किलोमीटर वायाडक्ट (खंभों पर टिका पुल), 39 रोड अंडर ब्रिज और 2 रेल ओवर रेल ब्रिज का निर्माण किया जाएगा। ट्रैक की कुल लंबाई लगभग 293 किलोमीटर होगी। परियोजना को अगले 4 वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, "अहमदाबाद–धोलेरा सेमी हाई-स्पीड रेल परियोजना भारत के रेलवे इतिहास में एक नई शुरुआत है। यह केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि 'न्यू इंडिया' की आधुनिक, तेज और आत्मनिर्भर परिवहन व्यवस्था का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय रेलवे आत्मनिर्भर भारत के विजन को नई गति दे रहा है। स्वदेशी तकनीक आधारित यह परियोजना भविष्य में देशभर में सेमी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क विस्तार का आधार बनेगी।"

गुजरात सरकार के मुख्य सचिव मनोज कुमार दास ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के दूरदर्शी नेतृत्व में स्वीकृत यह परियोजना गुजरात के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास में नया अध्याय सिद्ध होगी। धोलेरा रीजन को साबरमती, धोलेरा एयरपोर्ट और लोथल से जोड़ने वाला यह कॉरिडोर राज्य की आर्थिक प्रगति को नई दिशा देगा। साबरमती, गांधीग्राम एवं वस्त्रापुर स्टेशनों पर मेट्रो एकीकरण, साबरमती में बुलेट ट्रेन कनेक्टिविटी तथा मोरैया में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ाव गुजरात को विश्वस्तरीय मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में स्थापित करेगा।"

अहमदाबाद मंडल रेल प्रबंधक वेद प्रकाश ने कहा, "134 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर एक्सप्रेसवे के समानांतर नए संरेखण पर विकसित किया जाएगा। यह परियोजना अहमदाबाद एवं धोलेरा क्षेत्र को विश्वस्तरीय रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगी। इससे यात्रियों को तेज, सुरक्षित एवं आधुनिक यात्रा सुविधा मिलेगी तथा क्षेत्र में उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार को भी नई गति मिलेगी।"

मंडल रेल प्रबंधक बताया कि विश्व का पहला ब्रॉडगेज सेमी-हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर अब गुजरात में बनने जा रहा है। पहली बार दुनिया में कोई सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन 220 किमी/घंटा की रफ्तार से ब्रॉडगेज ट्रैक पर दौड़ेगी। यह पूरी परियोजना और ट्रेन पूरी तरह मेक इन इंडिया तकनीक पर आधारित होगी। ट्रेन में अत्याधुनिक कवच 5.0 सुरक्षा प्रणाली लगाई जाएगी, जिससे सुरक्षा और ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन का नया मानक स्थापित होगा।

अब तक दुनिया में सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनें मुख्यतः स्टैंडर्ड गेज पर चलती रही हैं, लेकिन भारत पहली बार ब्रॉडगेज नेटवर्क पर 220 किमी प्रति घंटा स्पीड का सफल मॉडल विकसित करने जा रहा है। यह सिर्फ एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि भारतीय इंजीनियरिंग, आत्मनिर्भरता और रेलवे आधुनिकीकरण का ऐतिहासिक अध्याय है। इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद अहमदाबाद और धोलेरा के बीच यात्रा समय घटकर लगभग 1 घंटे से भी कम रह जाएगा, जबकि धोलेरा को सीधे अहमदाबाद–मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से जोड़ने में भी सहायता मिलेगी।

इस परियोजना से लगभग 284 गांवों और 5 लाख से अधिक आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके अलावा प्रतिवर्ष लगभग 20 लाख टन अतिरिक्त मालभाड़ा परिवहन क्षमता, लॉजिस्टिक लागत में प्रतिवर्ष लगभग 54 करोड़ की बचत, निर्माण चरण में लगभग 91 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजन और लगभग 0.48 करोड़ लीटर ईंधन की वार्षिक बचत होगी। वहीं, लगभग 2 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी (लगभग 10 लाख पेड़ों के रोपण के बराबर), साबरमती, गांधीग्राम एवं वस्त्रापुर स्टेशनों पर मेट्रो नेटवर्क से एकीकरण, साबरमती स्टेशन पर बुलेट ट्रेन कनेक्टिविटी, मोरैया (साणंद) में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तथा भीमनाथ लॉजिस्टिक हब से संपर्क होगा।

यह परियोजना प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अनुरूप विकसित की जा रही है, जिसका उद्देश्य मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी को मजबूत करना तथा भारत की लॉजिस्टिक दक्षता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है। यह कॉरिडोर गुजरात को आधुनिक, हरित एवं उच्च गति परिवहन अवसंरचना के नए युग में प्रवेश कराने वाली ऐतिहासिक पहल सिद्ध होगा।

--आईएएनएस

ओपी/वीसी

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