ड्रग्स मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से छात्र को मिली जमानत, अदालत ने वीडियोग्राफी न होने पर उठाए सवाल
मुंबई, 16 अगस्त (आईएएनएस)। ड्रग्स रखने के आरोप में 14 अक्टूबर 2024 को गिरफ्तार किए गए केरल के एक छात्र को करीब 1 साल 10 महीने बाद बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिली। छात्र पुणे में पढ़ाई के लिए आया था और उसे पुणे जेल में रखा गया था। जमानत देते हुए कोर्ट ने उसकी लंबी जेल अवधि को ध्यान में रखा। वहीं, वकील अली काशिफ खान देशमुख ने बताया कि आदेश में जब्ती की वीडियोग्राफी न होने पर भी अहम टिप्पणी की गई है।
मामले की जानकारी देते हुए वकील अली काशिफ खान देशमुख ने बताया कि यह एनडीपीएस का केस है। पुलिस का दावा था कि छात्र के पास से 12 एलएसडी पेपर और एक स्टार आकार की एनडीएमए टैबलेट बरामद हुई थी। हालांकि, वकील देशमुख ने कहा कि नए बीएनएस कानून के तहत ड्रग्स की जब्ती की पूरी प्रक्रिया में वीडियोग्राफी अनिवार्य है, ताकि पुलिस पर गलत तरीके से ड्रग्स रखने का आरोप न लगे। कोर्ट ने इसी बिंदु को भी जमानत के दौरान अहम माना।
ड्रग्स केस में दो साल बाद बॉम्बे हाईकोर्ट से स्टूडेंट्स को बेल मिलने पर वकील अली काशिफ खान देशमुख ने कहा, "गिरफ्तारी 14 अक्टूबर, 2024 को हुई थी, जिसका मतलब है कि स्टूडेंट ने एक साल और 10 महीने जेल में बिताए थे। उसे पुणे जेल में रखा गया था और जज ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि वह इतने लंबे समय से सलाखों के पीछे था।"
उन्होंने आगे कहा, "आदेश में एक और बहुत दिलचस्प बात जब्ती के बारे में कही गई है। जब किसी के पास से ड्रग्स बरामद होते हैं तो नए बीएनएस एक्ट के तहत पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवानी जरूरी है। यह पुलिस को किसी पर गलत तरीके से ड्रग्स रखने और बाद में यह दावा करने से रोकने के लिए है कि ड्रग्स उनके पास से बरामद हुए थे।"
वकील ने इस मामले की विस्तार से जानकारी देते हुए कहा, "यह एक एनडीपीएस केस है, जिसमें पुलिस ने केरल के एक यंग स्टूडेंट को गिरफ्तार किया जो पढ़ाई के लिए पुणे आया था।"
उन्होंने आगे बताया कि पुलिस ने दावा किया कि उसे 12 एलएसडी पेपर्स के साथ पकड़ा गया था। एलएसडी एक ड्रग है जो पेपर के रूप में आता है। उन्होंने एफआईआर में यह भी दावा किया कि एक एनडीएमए टैबलेट, जो स्टार के आकार की थी, बरामद हुआ था।
--आईएएनएस
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