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दृढ़ विश्वास, सतत प्रयास और सकारात्मक सोच सफलता की असली कुंजी: प्रधानमंत्री मोदी

दृढ़ विश्वास, सतत प्रयास और सकारात्मक सोच सफलता की असली कुंजी: प्रधानमंत्री मोदी
दृढ़ विश्वास, सतत प्रयास और सकारात्मक सोच सफलता की असली कुंजी: प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली, 9 जुलाई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर गुरुवार को सुभाषित शेयर किया। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, "दृढ़ विश्वास, सतत प्रयास और सकारात्मक सोच सफलता की असली कुंजी है। हमारे युवा साथी इन्हीं गुणों के साथ पूरे समर्पण भाव से विकसित भारत के निर्माण में जुटे हैं।"

पीएम ने संस्कृत श्लोक "अनिर्वेदः श्रियो मूलमनिर्वेदः परं सुखम्। अनिर्वेदो हि सततं सर्वार्थेषु प्रवर्तकः॥" शेयर किया।

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि उन्नति का मूल आधार उत्साह, दृढ़ विश्वास और निरंतर पुरुषार्थ है। जो व्यक्ति निराश हुए बिना अपने लक्ष्य की ओर सतत प्रयासरत रहता है। वह अंततः सफलता प्राप्त कर लेता है। अतः मनुष्य को दृढ़ विश्वास के साथ निरंतर कर्म करते रहना चाहिए, क्योंकि यही गुण उसके जीवन को प्रगति, सफलता और उत्कृष्टता की ओर अग्रसर करते हैं।"

बीते दिन बुधवार को पीएम मोदी ने सुभाषित शेयर करते हुए लिखा था, "धैर्य किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति है। इससे कठिन चुनौतियों के बीच भी देश को एकजुट रहने के साथ ही प्रगति, समृद्धि और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।"

पीएम मोदी की ओर से एक श्लोक "चलन्ति गिरयः कामं युगान्तपवनाहताः। कृच्छ्रेऽपि न चलत्येव धीराणां निश्चलं मनः।।" भी साझा किया गया था।

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि प्रलय के समय प्रचंड वायु के प्रहार से पर्वत भी विचलित होकर हिलने लगते हैं, किंतु विपत्तियों के बीच भी धैर्यवान का मन अचल और अविचलित बना रहता है।

इससे पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी ने सुभाषित शेयर करते हुए 'एक्स' पर लिखा था, "समृद्धि की शोभा विनम्रता और परोपकार में निहित है। सफलता वही सार्थक है, जिसमें लोककल्याण की भावना सर्वोपरि हो।"

पीएम ने एक श्लोक भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैर्नवाम्बुभि-र्दूर-विलम्बिनो घनाः। अनुद्धताः सत्पुरुषाः समृद्धिभिः स्वभाव एवैष परोपकारिणाम्॥ भी साझा किया था।

इस श्लोक का हिंदी अर्थ है कि जिस प्रकार फल आने पर वृक्ष और जल से भरे मेघ धरती की ओर झुक जाते हैं, उसी प्रकार परोपकारी सज्जन महात्मा समृद्धि और प्रसिद्धि प्राप्त करने के बाद अहंकार नहीं करते, अपितु अपना जीवन समाज की उन्नति के लिए समर्पित कर देते हैं।

--आईएएनएस

एसडी/वीसी

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