डीआरसी में इबोला: तेजी से फैल रहा संक्रमण, मृतकों की संख्या 2,500 के पार
किंशासा, 22 अगस्त (आईएएनएस)। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (डीआरसी) में इबोला का प्रकोप दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने दोहराया है कि यह इतिहास के सबसे घातक इबोला प्रकोप को भी पीछे छोड़ सकता है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, यह अब तक का सबसे तेजी से फैलने वाला इबोला प्रकोप बन चुका है।
अफ्रीका सीडीसी के आंकड़ों के अनुसार, 21 अगस्त तक कांगो में 5,290 कन्फर्म केस और 2,516 लोगों की मौत दर्ज की गई है। हालांकि अधिकारियों का अनुमान है कि वास्तविक संक्रमितों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि फिलहाल केवल 30 से 40 प्रतिशत मामलों का ही पता चल पा रहा है।
सबसे बड़ी चिंता इसकी रफ्तार है। अफ्रीका सीडीसी के मुताबिक, प्रकोप के 13वें सप्ताह तक वर्तमान संक्रमण संख्या 2014-16 के पश्चिम अफ्रीका के इबोला प्रकोप की इसी अवधि की तुलना में लगभग 10 गुना अधिक, जबकि मौतों की संख्या करीब सात गुना अधिक है। उस महामारी में 28,000 से अधिक लोग संक्रमित हुए थे और 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
यह प्रकोप बुंडीबुग्यो वायरस के कारण हो रहा है। इस वायरस के खिलाफ फिलहाल कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। इसके लक्षण कुछ अन्य इबोला प्रकारों की तुलना में हल्के हो सकते हैं, जिससे लोग शुरुआती चरण में अस्पताल या स्वास्थ्य अधिकारियों से संपर्क करने में देर कर रहे हैं।
कांगो के पूर्वी हिस्से में जारी सशस्त्र संघर्ष, बड़े पैमाने पर विस्थापन, लोगों की लगातार आवाजाही और स्वास्थ्य अधिकारियों के प्रति अविश्वास ने बीमारी पर नियंत्रण को बेहद कठिन बना दिया है। संक्रमण अब छह प्रांतों के 56 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। हाल ही में बास-उएले प्रांत में भी दो मामले सामने आए हैं। यहां पहले यह संक्रमण नहीं पहुंच पाया था।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाने की प्रक्रिया बेहद कमजोर है। वर्तमान में 10 प्रतिशत से भी कम नए मामले ऐसे लोगों में मिल रहे हैं जो पहले से निगरानी में थे, जबकि किसी प्रकोप को नियंत्रण में मानने के लिए यह अनुपात आम तौर पर 90-95 प्रतिशत के आसपास होना चाहिए।
मौतों का बड़ा हिस्सा भी अस्पतालों के बाहर हो रहा है। 17 अगस्त को दर्ज मौतों में 97 प्रतिशत मौत समुदाय के स्तर पर हुईं, यानी संक्रमित लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाई।
डब्ल्यूएचओ का आकलन है कि यदि संक्रमण की मौजूदा रफ्तार पर प्रभावी ढंग से रोक नहीं लगाई गई तो यह प्रकोप 2014-16 के पश्चिम अफ्रीकी इबोला संकट को पीछे छोड़कर इतिहास का सबसे घातक इबोला प्रकोप बन सकता है।
--आईएएनएस
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