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डीआरसी में इबोला का प्रकोप जारी: मृतकों की संख्या 500 पार, इलाज के लिए क्लीनिकल ट्रायल शुरू

डीआरसी में इबोला का प्रकोप जारी: मृतकों की संख्या 500 पार, इलाज के लिए क्लीनिकल ट्रायल शुरू
डीआरसी में इबोला का प्रकोप जारी: मृतकों की संख्या 500 पार, इलाज के लिए क्लीनिकल ट्रायल शुरू

किंशासा, 6 जुलाई (आईएएनएस)। लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो (डीआरसी) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। देश के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसे लेकर रिपोर्ट जारी की है, जिसके मुताबिक महामारी से अब तक 506 लोगों की मौत हो चुकी है।

रविवार को जारी रिपोर्ट के हवाले से सिंहुआ न्यूज एजेंसी ने बताया कि, देश में अब तक 1,561 के इबोला संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है। इनमें 506 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 254 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। वहीं, 628 संक्रमित मरीज फिलहाल आइसोलेशन या अस्पताल में भर्ती हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने 354 संदिग्ध मामलों की भी पहचान की है, जिनमें 110 लोगों की मौत हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इबोला का प्रकोप अब तक तीन प्रांतों के 36 स्वास्थ्य क्षेत्रों में फैल चुका है। हाल के हफ्तों में संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। महामारी के 25वें और 26वें सप्ताह में 300 से अधिक नए पुष्ट मामले दर्ज किए गए, जो इस प्रकोप की शुरुआत के बाद सबसे अधिक हैं। इससे स्पष्ट है कि समुदाय में संक्रमण अभी भी तेजी से फैल रहा है।

इस बीच, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गुरुवार को बताया कि डीआरसी में बुंडीबुग्यो इबोलावायरस से होने वाली इबोला बीमारी के संभावित इलाज की जांच के लिए क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया गया है। इस वायरस के खिलाफ फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष उपचार उपलब्ध नहीं है।

क्लीनिकल ट्रायल की शुरुआत इतुरी प्रांत के रवामपारा स्वास्थ्य क्षेत्र स्थित सीएमई इबोला उपचार केंद्र में की गई है, जिसे इस प्रकोप का केंद्र माना जा रहा है।

डब्ल्यूएचओ ने उसी दिन घोषणा की कि अध्ययन में पहला प्रतिभागी शामिल कर लिया गया है। यह ट्रायल इस बात की जांच कर रहा है कि क्या एंटीवायरल दवा रेमडेसिविर, प्रायोगिक एंटीबॉडी उपचार एमबीपी134, या दोनों का संयोजन बुंडीबुग्यो वायरस से संक्रमित मरीजों की जीवित रहने की संभावना बढ़ा सकता है।

डब्ल्यूएचओ के शोध सलाहकार डॉ. वसी मूर्ति के अनुसार, इलाज शुरू होने के बाद मरीजों की स्थिति पर 28 दिनों तक निगरानी रखी जाएगी ताकि परिणामों का आकलन किया जा सके।

यह डब्ल्यूएचओ समर्थित क्लीनिकल ट्रायल कई संस्थानों की साझेदारी से चल रहा है, जिसमें कांगो का राष्ट्रीय बायोमेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएनआरबी), ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, बेल्जियम का एंटवर्प इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन, और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन शामिल हैं।

--आईएएनएस

केआर/

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