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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कभी भी पद को नहीं, विचार को महत्व दिया: जेपी नड्डा

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कभी भी पद को नहीं, विचार को महत्व दिया: जेपी नड्डा
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कभी भी पद को नहीं, विचार को महत्व दिया: जेपी नड्डा

अंबाला, 6 जुलाई (आईएएनएस)। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर हरियाणा के अंबाला जिले में आयोजित कार्यक्रम को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने संबोधित किया।

सभा को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा, "मेरा ये सौभाग्य है कि मुझे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की 125वीं जन्म-जयंती के अवसर पर हरियाणा की पवित्र भूमि पर अंबाला आने का अवसर मिला है। यह भूमि सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से गीता की भूमि कही जाती है। इस भूमि को आजादी के वीरों के लिए जाना जाता है। खेलों में हमारे देश का नाम रोशन करने वाली हरियाणा की इस भूमि को मैं नमन करता हूं।"

उन्होंने कहा कि आज जब मैं यहां आया हूं, तो मैं कहूंगा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के जीवन से हमें जो दृष्टि मिलती है, उसकी भावना एक भारत-श्रेष्ठ भारत में निहित है। उनका जीवन इसके लिए ही समर्पित किया। हम जिस पार्टी के सदस्य हैं, उसके वे संस्थापक सदस्य रहे और 21 अक्टूबर, 1951 को उन्होंने इस विचारधारा, भारतीय जनसंघ, की स्थापना की। आज हमें खुशी है कि जिस पौधे की जड़ों को उन्होंने सींचा, आज वह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और एनडीए आज देश की 78 प्रतिशत जनसंख्या पर राज कर रही है और लगभग 72 प्रतिशत भू-भाग पर एनडीए और भारतीय जनता पार्टी का कमल खिला है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कभी भी पद को नहीं बल्कि विचार को महत्व दिया और जब-जब बारी आई विचार के लिए पद को त्यागा और विचार के साथ खड़े रहे।

उन्होंने कहा कि हुसैन सुहरावर्दी की सरकार थी, जिसके अंतर्गत पूरा पश्चिम और पूर्वी बंगाल आता था, उसने योजना बना ली थी कि विभाजन में यह पाकिस्तान के साथ जाएगा। उस समय श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने जन-आंदोलन चलाया और जन-आंदोलन चलाने के बाद उन्होंने कहा कि हम ये कभी नहीं होने देंगे। आज जो पश्चिम बंगाल है, ये श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की देन है। नहीं तो कांग्रेस ने ये मान लिया था कि पूरा का पूरा बंगाल पूर्वी पाकिस्तान में चला जाएगा।

जेपी नड्डा ने आगे कहा कि खुशी की बात यह है कि आज उनकी 125वीं जयंती के अवसर पर उस पश्चिम बंगाल में मोदी जी के नेतृत्व में कमल खिला है। शायद 125वीं जयंती पर इससे अच्छी कोई भेंट नहीं हो सकती थी कि पश्चिम बंगाल की जनता ने आज भाजपा की सरकार वहां बनाकर दी है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी कुशल प्रशासक थे। वे शिक्षाविद थे, वाइस चांसलर बनें, विधायक बनें, मंत्री बनें।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब 1947 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें बुलाकर कैबिनेट मंत्री बनाया, तो एक साल के अंदर वह औद्योगिक नीति लेकर आए और उन्होंने आत्मनिर्भर भारत, जिसके लिए आज पीएम मोदी दिनरात काम कर रहे हैं, की नींव 1948 में रख दी थी। उन्होंने नारा दिया कि एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे। उन्होंने 1950 में जम्मू कश्मीर में जाकर कहा कि मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि मैं आपको एक संविधान दूंगा और अगर नहीं दे पाया तो अपना बलिदान दूंगा।

जेपी नड्डा ने कहा कि 1953 में उनके बलिदान के बाद हम नारा लगाते रहे कि 'जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है, वो सारे का सारा है।' 4 पीढ़ियों तक हम नारा लगाते रहे कि 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।' 5 अगस्त, 2019 को प्रधानमंत्री मोदी की इच्छाशक्ति ने इस धारा 370 को धराशायी कर दिया। तब से जम्मू-कश्मीर में एक विधान, एक प्रधान और एक निशान लागू हो गया।

--आईएएनएस

एसडी/एएस

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