चंडीगढ़ में डॉक्टर के इस्तीफे से हड़कंप, ICU में भर्ती को लेकर गंभीर आरोप; मानवाधिकार आयोग ने सराहना की
चंडीगढ़ के एक नामी अस्पताल में उस समय हड़कंप मच गया जब डॉ. प्रभलीन कौर ने अपने पहले ही दिन नौकरी से इस्तीफा देकर गंभीर आरोप लगाए। इस घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली और अस्पतालों में मरीजों के इलाज से जुड़े फैसलों पर एक नई बहस छेड़ दी है।डॉ. प्रभलीन कौर ने आरोप लगाया है कि अस्पताल की प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर अनियमितताएं हैं और मरीजों को कथित तौर पर अनावश्यक रूप से ICU में भर्ती रखने का दबाव बनाया जाता है। उनका दावा है कि ऐसा करने का उद्देश्य मरीजों पर भारी-भरकम बिल थोपना है, जिससे अस्पताल का राजस्व बढ़ाया जा सके।
डॉक्टर के अनुसार, उन्होंने यह व्यवहार अपने पहले ही दिन काम के दौरान महसूस किया, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पद छोड़ने का निर्णय लिया। इस फैसले को उन्होंने नैतिकता और पेशेवर जिम्मेदारी से जुड़ा कदम बताया।इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य क्षेत्र में पारदर्शिता और नैतिकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
इसी बीच, National Human Rights Commission ने इस घटना पर संज्ञान लेते हुए डॉक्टर के साहसिक कदम की सराहना की है। आयोग ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था में संभावित अनियमितताओं के खिलाफ एक महत्वपूर्ण आवाज बताया है और कहा है कि ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है।हालांकि, अभी तक अस्पताल प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रबंधन की ओर से कहा गया है कि वे मामले की आंतरिक जांच कर रहे हैं और सभी तथ्यों की समीक्षा के बाद ही कोई बयान दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों को अनावश्यक रूप से गंभीर देखभाल इकाई (ICU) में रखा जाता है, तो यह न केवल नैतिक रूप से गलत है बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाता है।यह मामला सामने आने के बाद चिकित्सा जगत में भी हलचल बढ़ गई है। कई डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि कोई अनियमितता हो तो उस पर कार्रवाई की जा सके।फिलहाल यह मामला जांच और चर्चा के बीच है, लेकिन डॉ. प्रभलीन कौर के इस कदम को कई लोग साहसिक और सिस्टम के खिलाफ एक मजबूत आवाज के रूप में देख रहे हैं।

