तेज़ बेस वाला डीजे संगीत स्वास्थ्य के लिए बन रहा खतरा: कान सुन्न, काँच चटक, बुज़ुर्ग और बच्चों पर असर
शहर के कई इलाकों में तेज़ बेस वाला डीजे संगीत अब सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा है। दुकानों और आयोजनों में यह ध्वनि इतनी तीव्र है कि दीवारें हिल रही हैं, काँच चटक रहे हैं और आसपास रहने वाले लोगों के कान सुन्न हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक इतनी तेज़ ध्वनि में रहने से दिल के मरीजों, उच्च रक्तचाप (बीपी) रोगियों, बुज़ुर्गों और छोटे बच्चों पर गंभीर असर पड़ सकता है। कानों में दर्द, चक्कर, सिरदर्द और तनाव जैसी समस्याएं आम हो रही हैं। बच्चों में अस्थिरता और नींद की समस्या भी बढ़ रही है।
हृदय रोग विशेषज्ञों ने चेताया है कि तेज़ ध्वनि से दिल की धड़कन असामान्य हो सकती है और बीपी रोगियों का रक्तचाप बढ़ सकता है। वहीं, न्यूरोलॉजिस्ट ने कहा कि लगातार उच्च ध्वनि में रहने से मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन भी बढ़ सकता है।
वन्यजीवों और पालतू जानवरों पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। तेज़ संगीत से वे घबराते हैं और आसपास के पर्यावरण पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी जारी की है कि डीजे और तेज़ ध्वनि वाले उपकरणों का उपयोग नियंत्रित मात्रा में किया जाए। लोगों से अपील की गई है कि यदि संभव हो तो ऐसे क्षेत्रों से दूर रहें और बच्चों, बुज़ुर्गों और बीमार व्यक्तियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

