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दीया मिर्जा वीडियो विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले को भाई जगताप ने भाजपा की छोटी मानसिकता पर तमाचा बताया

दीया मिर्जा वीडियो विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले को भाई जगताप ने भाजपा की छोटी मानसिकता पर तमाचा बताया
दीया मिर्जा वीडियो विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले को भाई जगताप ने भाजपा की छोटी मानसिकता पर तमाचा बताया

मुंबई, 3 नवंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य भाई जगताप ने दीया मिर्जा के प्रदूषण मुक्त दिवाली वाले वीडियो, राहुल गांधी पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की टिप्पणी, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' रैली को लेकर भाजपा पर जुबानी हमला किया। बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से बीएमसी को दीया मिर्जा का वीडियो दोबारा अपलोड करने का निर्देश दिए जाने पर उन्होंने इसे भाजपा की कथित छोटी मानसिकता पर तमाचा बताया। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घुसपैठियों से जुड़े दावे पर सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने करोड़ों लोगों के मताधिकार को प्रभावित किया है।

बॉम्बे हाई कोर्ट की ओर से बीएमसी को दीया मिर्जा का 'प्रदूषण मुक्त दिवाली' वाला वीडियो फिर से अपलोड करने के निर्देश पर भाई जगताप ने अदालत का आभार जताया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने भाजपा की छोटी मानसिकता पर करारा तमाचा मारा है। दीया मिर्जा एक पर्यावरण कार्यकर्ता, पूर्व मिस इंडिया और अभिनेत्री हैं। वह पर्यावरण के क्षेत्र में अच्छा काम कर रही हैं और उनका वीडियो भी प्रदूषण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से बनाया गया था। भाजपा ने केवल दीया मिर्जा के मुस्लिम होने के कारण उनके साथ इस तरह का व्यवहार किया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार या महानगरपालिका ने किसी व्यक्ति को पर्यावरण से जुड़े अभियान के लिए आमंत्रित किया है, तो उसके काम को धार्मिक पहचान के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। देश का संविधान सभी 140 करोड़ नागरिकों के लिए समान है। किसी भी क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्ति के साथ धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस पूरे मामले में भाजपा की राजनीति की कड़े शब्दों में निंदा की।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्होंने हमेशा नीला संविधान देखा है और राहुल गांधी लाल संविधान लेकर घूम रहे हैं, पर भी भाई जगताप ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संविधान नीला या लाल नहीं होता। देश का संविधान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का संविधान है और उसकी पहचान किसी रंग से नहीं की जा सकती। संविधान में क्या लिखा है और उसमें दिए गए अधिकारों का किस तरह पालन किया जा रहा है, यह अधिक महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी संसद में संविधान को माथे पर लगाकर आते हैं, लेकिन इसके बाद भी संविधान की भावना के विपरीत काम करते हैं। प्रधानमंत्री हों या मुख्यमंत्री, सभी को संविधान के मूल्यों का पालन करना चाहिए। संविधान देश के 140 करोड़ नागरिकों की आत्मा है और उसका कोई रंग नहीं होता।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस दावे पर कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए तीन करोड़ नाम घुसपैठियों के थे और कांग्रेस ने उनके नाम दर्ज करवाए थे, भाई जगताप ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने तीन करोड़ नहीं, बल्कि साढ़े तेरह करोड़ लोगों के नाम कटवाए हैं। यदि तीन करोड़ लोग कथित तौर पर घुसपैठिए थे, तो बाकी साढ़े दस करोड़ लोगों के नाम क्यों हटाए गए? उन्होंने सवाल किया कि लोगों का संवैधानिक अधिकार छीनने का अधिकार निर्वाचन आयोग को किसने दिया। जगताप ने आरोप लगाया कि यह सब सरकार के निर्देश पर हुआ और भाजपा का उद्देश्य मतदाता सूची में बदलाव करके चुनावी लाभ हासिल करना है।

उन्होंने अमित शाह के दावे को खारिज करते हुए कहा कि यदि ये लोग घुसपैठिए थे, तो 2014 में सत्ता में आने के बाद सरकार ने उनकी पहचान कर कार्रवाई क्यों नहीं की? कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा का एजेंडा वोट चोरी के जरिए सत्ता में बने रहना है। जनता अब सरकार के दावों को समझ चुकी है। इसलिए अब हमने नया नारा दिया है, 'तब लड़ रहे थे गोरों से आजादी के पहले, अब लड़ेंगे तुम्हारे जैसे वोट चोरों से।'

दिल्ली में कांग्रेस की रैली के विरोध में भाजपा की ओर से विभिन्न राज्यों में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च निकाले जाने पर भी भाई जगताप ने निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केंद्र और कई राज्यों में भाजपा की सरकार है। ऐसे में यदि लोकतंत्र खतरे में है, तो इसकी जिम्मेदारी भी सरकार की ही बनती है। सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करना देश के नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। छात्र, महिलाएं और युवा अपनी समस्याओं को लेकर आवाज उठाते हैं, तो उन्हें अराजकता फैलाने वाला नहीं कहा जा सकता। जगताप ने आरोप लगाया कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर लाठियां चलाई गईं और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया। उन्होंने किसान आंदोलन का उल्लेख करते हुए दावा किया कि दिल्ली में 7 से ज्यादा किसानों ने अपनी जान गंवाई। सरकार इन घटनाओं को अराजकता नहीं मानती, लेकिन अपने खिलाफ उठने वाली आवाजों को इसी नाम से प्रचारित करती है। केंद्र और राज्य सरकारें लोकतांत्रिक तरीके से शासन नहीं चला रही हैं।

--आईएएनएस

पीएसके

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