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Diwali 2026: भारत की इन 7 जगहों की दिवाली है सबसे खास, कहीं जलते हैं लाखों दीये तो कहीं दिखता है शाही जश्न

Diwali 2026: भारत की इन 7 जगहों की दिवाली है सबसे खास, कहीं जलते हैं लाखों दीये तो कहीं दिखता है शाही जश्न

भारत में दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और खुशियों का ऐसा उत्सव है, जिसे देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने खास अंदाज में मनाया जाता है। कहीं लाखों मिट्टी के दीयों से पूरा शहर रोशन हो जाता है, तो कहीं ऐतिहासिक गुरुद्वारे की चमक मन मोह लेती है। राजस्थान के शाही महलों से लेकर कोलकाता की भव्य काली पूजा तक, हर जगह दिवाली का रंग अलग दिखाई देता है।इस साल दिवाली 8 नवंबर 2026 को मनाई जाएगी। अगर आप इस बार दिवाली को कुछ अलग अंदाज में अनुभव करना चाहते हैं, तो भारत की ये 7 जगहें आपके लिए खास हो सकती हैं। आइए जानते हैं कहां की दिवाली क्यों है इतनी मशहूर और वहां क्या देखने को मिलता है।

1. अयोध्या: लाखों दीयों से जगमगाती रामनगरी

अयोध्या में दिवाली का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बेहद खास है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। उनके स्वागत में नगरवासियों ने दीप जलाए थे। इसी परंपरा की याद में अयोध्या में दीपोत्सव का आयोजन किया जाता है।

सरयू नदी के घाट, राम की पैड़ी और आसपास के मंदिर दीपों और रोशनी से सजाए जाते हैं। शाम के समय हजारों-लाखों दीपों की कतारें बेहद खूबसूरत दृश्य बनाती हैं। अयोध्या की दिवाली में रामलीला, भजन, आरती और धार्मिक कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहते हैं।

क्या देखें: राम की पैड़ी, सरयू घाट, राम मंदिर और शाम की आरती।

2. वाराणसी: गंगा घाटों पर दिखती है रोशनी की अद्भुत छटा

वाराणसी की दिवाली का आकर्षण यहां के प्राचीन घाट और गंगा आरती हैं। दिवाली के आसपास शहर के मंदिरों और गलियों में रोशनी दिखाई देती है। हालांकि वाराणसी का सबसे बड़ा दीपोत्सवी आकर्षण देव दीपावली है, जो कार्तिक पूर्णिमा पर दिवाली के लगभग 15 दिन बाद मनाई जाती है।

देव दीपावली के अवसर पर गंगा के घाटों को लाखों दीपों से सजाया जाता है। दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और अन्य घाटों पर दीपों की कतारें देखने लायक होती हैं। गंगा आरती के दौरान घंटियों, मंत्रों और दीपों का संगम एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव देता है।

क्या देखें: दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, गंगा आरती और देव दीपावली का आयोजन।

3. जयपुर: गुलाबी नगरी में दिखता है शाही रोशनी का नजारा

राजस्थान की राजधानी जयपुर में दिवाली का जश्न अपनी शाही विरासत और खूबसूरत बाजारों के कारण खास माना जाता है। गुलाबी नगरी के पुराने बाजारों में रंग-बिरंगी रोशनी, सजावट और आकर्षक लाइटिंग देखने को मिलती है। जौहरी बाजार, बापू बाजार, त्रिपोलिया बाजार और किशनपोल जैसे इलाके त्योहार के दौरान खास रौनक से भर जाते हैं।

हवा महल, सिटी पैलेस और ऐतिहासिक इमारतों के आसपास की सजावट शहर की खूबसूरती को और बढ़ा देती है। रात के समय नाहरगढ़ की ऊंचाई से रोशनी में नहाए जयपुर का नजारा देखने लायक होता है।

जयपुर की दिवाली की खास बात यह है कि यहां खरीदारी, राजस्थानी संस्कृति, पारंपरिक मिठाइयों और ऐतिहासिक विरासत का अनोखा मेल देखने को मिलता है।

क्या देखें: जौहरी बाजार, बापू बाजार, हवा महल, सिटी पैलेस और नाहरगढ़ से शहर का नजारा।

4. अमृतसर: स्वर्ण मंदिर की रोशनी और बंदी छोड़ दिवस की परंपरा

अमृतसर में दिवाली का जश्न धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां इस अवसर को बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। सिख परंपरा के अनुसार, छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी की मुक्ति की स्मृति में यह दिन विशेष महत्व रखता है।

इस मौके पर स्वर्ण मंदिर को दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है। पवित्र सरोवर में मंदिर की रोशनी का प्रतिबिंब बेहद मनमोहक दिखाई देता है। गुरुद्वारे में कीर्तन, अरदास और श्रद्धालुओं की सेवा का वातावरण इस पर्व को और खास बना देता है।

क्या देखें: स्वर्ण मंदिर, अमृत सरोवर, कीर्तन और बंदी छोड़ दिवस के धार्मिक आयोजन।

5. उदयपुर: झीलों और महलों के बीच शाही दिवाली

उदयपुर को झीलों की नगरी कहा जाता है और दिवाली के दौरान इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। यहां के ऐतिहासिक महल, हवेलियां और बाजार रोशनी से सजाए जाते हैं। पिछोला झील के आसपास जब महलों की लाइटिंग पानी में प्रतिबिंबित होती है, तो नजारा बेहद खूबसूरत लगता है।

सिटी पैलेस, जग मंदिर और पुराने शहर की गलियों में त्योहार का खास माहौल रहता है। जो लोग भीड़भाड़ से थोड़ा दूर रहकर शाही अंदाज में दिवाली का अनुभव करना चाहते हैं, उनके लिए उदयपुर एक शानदार विकल्प हो सकता है।

क्या देखें: सिटी पैलेस, पिछोला झील, अंब्राई घाट और जग मंदिर।

6. कोलकाता: दिवाली के साथ मां काली की भव्य पूजा

कोलकाता में दिवाली का स्वरूप देश के कई दूसरे शहरों से अलग दिखाई देता है। यहां दिवाली के अवसर पर मां काली की पूजा यानी काली पूजा का विशेष महत्व होता है। शहर के अलग-अलग इलाकों में भव्य पंडाल बनाए जाते हैं और मां काली की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं।रातभर पूजा-अर्चना, भजन और धार्मिक कार्यक्रमों का माहौल रहता है। कालीघाट और दक्षिणेश्वर जैसे प्रसिद्ध मंदिरों में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। रोशनी से सजे पंडाल और पारंपरिक पूजा को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं।

क्या देखें: कालीघाट मंदिर, दक्षिणेश्वर काली मंदिर और काली पूजा के पंडाल।

7. गोवा: नरकासुर के पुतलों के साथ मनाई जाती है दिवाली

गोवा की दिवाली भी अपनी अलग परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां दिवाली से पहले नरक चतुर्दशी के अवसर पर नरकासुर के बड़े-बड़े पुतले बनाए जाते हैं। इन पुतलों को रंग-बिरंगे कपड़ों और सजावट से आकर्षक रूप दिया जाता है।धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध करके लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। इसी घटना की याद में गोवा के कई इलाकों में नरकासुर के पुतले जलाए जाते हैं। कई स्थानों पर सबसे बड़े और आकर्षक पुतले बनाने की प्रतियोगिताएं भी आयोजित होती हैं।

क्या देखें: नरकासुर के पुतले, स्थानीय उत्सव, पारंपरिक सजावट और गोवा के बाजार।

दिवाली 2026 पर घूमने जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप दिवाली के मौके पर इनमें से किसी शहर में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए।

  • ट्रेन और फ्लाइट की बुकिंग: त्योहार के समय यात्रियों की संख्या बढ़ जाती है, इसलिए टिकट पहले से बुक करें।

  • होटल की व्यवस्था: अयोध्या, वाराणसी और अमृतसर जैसे धार्मिक शहरों में भीड़ अधिक हो सकती है। ठहरने की जगह पहले तय करें।

  • स्थानीय नियम: भीड़ नियंत्रण, ट्रैफिक और पटाखों से जुड़े स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

  • घाट और मंदिर: आरती या विशेष आयोजन देखने के लिए समय से पहले पहुंचें।

  • देव दीपावली की तारीख: वाराणसी की देव दीपावली मुख्य दिवाली की रात नहीं, बल्कि कार्तिक पूर्णिमा पर मनाई जाती है।

भारत की दिवाली क्यों है दुनिया से अलग?

भारत में दिवाली की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी विविधता है। अयोध्या में भगवान राम की वापसी की खुशी दिखाई देती है, अमृतसर में बंदी छोड़ दिवस का ऐतिहासिक महत्व सामने आता है, तो कोलकाता में मां काली की पूजा होती है। जयपुर और उदयपुर में राजस्थानी विरासत का शाही रंग नजर आता है।यही वजह है कि दिवाली केवल दीप जलाने या मिठाइयां बांटने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, आस्था और परंपराओं को करीब से समझने का अवसर भी है।

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