दिवाली पर फिर दिल्ली के गैस चेंबर बनने का खतरा, दिल्लीवाले ‘राम भरोसे’ : सौरभ भारद्वाज
नई दिल्ली, 2 नवंबर (आईएएनएस)। दिवाली से पहले ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति मिलने के बाद दिल्ली में प्रदूषण को लेकर सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी (आप) ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए आशंका जताई है कि इस बार भी दिवाली के बाद राजधानी की हवा जहरीली हो सकती है और दिल्ली एक बार फिर गैस चेंबर में तब्दील हो सकती है। आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली की जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया गया है और मौजूदा हालात में दिल्लीवाले ‘राम भरोसे’ हैं।
सौरभ भारद्वाज ने ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति आखिरी समय में दिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिवाली की तारीख पहले से तय होती है और सभी को एक साल पहले ही पता होता है कि त्योहार कब मनाया जाएगा। ऐसे में अदालत की ओर से आखिरी समय में ग्रीन पटाखों की अनुमति देने की क्या जरूरत है? उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट सरकारों और आम लोगों को बेहतर प्रबंधन की सीख देता है, तो इस मामले में समय रहते फैसला क्यों नहीं लिया गया। आखिरी समय में निर्णय लेने से व्यवस्था संभालने में मुश्किलें पैदा होंगी।
सौरभ भारद्वाज ने ग्रीन पटाखों के नाम पर सामान्य पटाखों की बिक्री होने की आशंका भी जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या पटाखा निर्माता पहले से जानते थे कि दिल्ली में ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति मिल जाएगी, जिसके चलते उन्होंने इतनी बड़ी मात्रा में इनका उत्पादन कर भंडारण किया? या फिर उन्होंने सामान्य प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे तैयार कर रखे थे, जिन्हें अब अदालत के आदेश के बाद ग्रीन पटाखों का लेबल लगाकर बाजार में उतार दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था में पटाखा विक्रेताओं के लाइसेंस तक की जांच ठीक से नहीं होती, वहां पुलिस का एक कांस्टेबल कैसे पहचान पाएगा कि कौन सा पटाखा वास्तव में ग्रीन है और कौन सा सामान्य पटाखा है।
आप प्रदेश अध्यक्ष ने पिछले साल दिवाली के दौरान दिल्ली में हुए प्रदूषण को लेकर भी भाजपा सरकार और दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले साल पुलिस के भ्रष्ट अधिकारियों ने कथित तौर पर रिश्वत लेकर सामान्य पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल की छूट दी थी। नियमों की खुलेआम अनदेखी हुई और हर तरह के पटाखे जलाए गए। इसका नतीजा यह हुआ कि दिवाली के बाद दिल्ली की हवा बेहद खराब हो गई और राजधानी गैस चेंबर जैसी स्थिति में पहुंच गई। भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पिछले साल प्रदूषण का स्तर इतना अधिक हो गया था कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) मॉनिटरिंग स्टेशनों की रीडिंग क्षमता भी प्रभावित होने लगी थी।
उन्होंने भाजपा सरकार पर रात के समय एक्यूआई मॉनिटरिंग स्टेशनों को बंद कराने और प्रदूषण के वास्तविक आंकड़ों में हेराफेरी करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने के बजाय उसके आंकड़ों को लेकर सवालों के घेरे में हैं। उन्होंने कहा कि जिस सरकार और व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रदूषण की निगरानी करना है, यदि वही व्यवस्था प्रदूषण के आंकड़ों में कथित गड़बड़ी करने लगे तो आम जनता को उससे क्या उम्मीद करनी चाहिए।
सौरभ भारद्वाज ने मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार प्रदूषण जैसे गंभीर मुद्दे पर प्रभावी कदम उठाने में नाकाम दिखाई दे रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसी सरकार और पुलिस पर बच्चों के स्वास्थ्य और दिल्ली के नागरिकों की सेहत की जिम्मेदारी छोड़ी जा सकती है? सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी इस मुद्दे को उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के समय पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ग्रीन पटाखों की अनुमति से जुड़े नियम और उनकी निगरानी की व्यवस्था पहले से स्पष्ट होनी चाहिए थी, ताकि सामान्य पटाखों को ग्रीन पटाखों के नाम पर बेचने की गुंजाइश न रहे।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साल दिवाली पर नियमों का पालन कराने में दिल्ली पुलिस पूरी तरह विफल रही थी और भाजपा सरकार प्रदूषण नियंत्रण के मोर्चे पर गंभीर नजर नहीं आई। भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली में रहने वाले लोगों, खासकर बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रदूषण का सीधा असर पड़ता है। इसके बावजूद सरकार की ओर से ऐसी व्यवस्था नहीं बनाई गई है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि केवल निर्धारित मानकों वाले ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल हो।
उन्होंने कहा कि दिवाली खुशियों और उत्सव का त्योहार है, लेकिन इसके नाम पर दिल्ली के लोगों को जहरीली हवा में सांस लेने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से पटाखों की बिक्री और गुणवत्ता की सख्त निगरानी करने तथा प्रदूषण के वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की। भारद्वाज ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो इस दिवाली के बाद भी दिल्लीवासियों को प्रदूषण की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
--आईएएनएस
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