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दिल्‍ली में मस्जिद के पास बुलडोजर की कार्रवाई और पत्‍थरबाजी दोनों गलत: एसटी हसन

नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली की मस्जिद के समीप चलाए गए बुलडोजर और इस दौरान पत्थरबाजी की घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद एसटी हसन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आधी रात के समय बुलडोजर द्वारा तोड़फोड़ और पत्थरबाजी दोनों गलत हैं।
दिल्‍ली में मस्जिद के पास बुलडोजर की कार्रवाई और पत्‍थरबाजी दोनों गलत: एसटी हसन

नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्‍ली की मस्जिद के समीप चलाए गए बुलडोजर और इस दौरान पत्‍थरबाजी की घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद एसटी हसन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्‍होंने कहा कि आधी रात के समय बुलडोजर द्वारा तोड़फोड़ और पत्‍थरबाजी दोनों गलत हैं।

उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि कड़ाके की ठंड में रात दो बजे बुलडोजर लेकर पहुंचना और फिर यह अफवाह फैल जाना कि एक 100 साल पुरानी मस्जिद पर बुलडोजर चलाया जा रहा है, बेहद बेतुका और गैर-जिम्मेदाराना है। हसन ने कहा कि संबंधित व्यक्ति एक सांसद हैं और सांसद होने के नाते उनका एक निर्धारित प्रोटोकॉल होता है। वे देश में कहीं भी अशांति की स्थिति में जा सकते हैं। अगर वह वास्तव में मौके पर मौजूद होते तो वह उनकी संवैधानिक भूमिका होती, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं था। उन्होंने कहा कि आज देश में लोकतंत्र नाम की चीज धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है, जबकि मंदिर और मस्जिद हमारी आस्था के केंद्र हैं और उन्हें लेकर इस तरह का रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

एसटी हसन ने पथराव की घटना की निंदा करते हुए कहा कि पथराव गलत है और किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हो सकता। लोगों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। जिन परिस्थितियों में यह पथराव हुआ, उसके लिए उकसाने वाले तत्व भी उतने ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने पूछा कि क्या इतनी ठंड में इस तरह की कार्रवाई करना सही था और क्या इस पूरे मामले को आलोचनात्मक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। एसटी हसन ने कहा कि गलत को गलत कहना जरूरी है—पथराव भी गलत है और आधी रात को बुलडोजर लेकर कार्रवाई करना भी उतना ही गलत है।

उन्होंने इस पूरी कार्रवाई के पीछे की मंशा पर भी संदेह जताया। उन्होंने सवाल किया कि रात दो बजे वहां जाने का आखिर मतलब क्या था? उन्होंने कहा कि आधी रात को बुलडोजर लेकर पहुंचकर कार्रवाई शुरू करना स्वाभाविक रूप से लोगों में डर और भ्रम पैदा करता है। भारत में लोग अफवाहों पर आसानी से विश्वास कर लेते हैं और इसी वजह से जब यह अफवाह फैली कि मस्जिद को गिराया जा रहा है तो प्रतिक्रिया होना तय था। उन्होंने कहा कि इस तरह की परिस्थितियां खुद प्रशासन की लापरवाही और जल्दबाजी से पैदा होती हैं।

एसटी हसन ने जनता से अपील की कि वह किसी भी हाल में कानून को अपने हाथ में न लें और शांति बनाए रखें। साथ ही, उन्होंने सरकार से मांग की कि उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, जिन्होंने सर्द रातों में इस तरह की कार्रवाई कर लोगों को उत्तेजित करने का काम किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए प्रशासन को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

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