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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले केंद्रीय मंत्री रिजिजू, 'भारत के शिक्षा तंत्र को मजबूत करने में उनकी सच्ची निष्ठा देखी है'

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले केंद्रीय मंत्री रिजिजू, 'भारत के शिक्षा तंत्र को मजबूत करने में उनकी सच्ची निष्ठा देखी है'
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले केंद्रीय मंत्री रिजिजू, 'भारत के शिक्षा तंत्र को मजबूत करने में उनकी सच्ची निष्ठा देखी है'

नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि भारत के शिक्षा तंत्र को मजबूत करने में मैंने उनकी सच्ची निष्ठा देखी है।

रिजिजू का यह बयान उस वक्त आया है जब जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के बीच, शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया।

रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, ''असली लीडरशिप की पहचान दशकों के काम से होती है और धर्मेंद्र प्रधान का सफर सार्वजनिक जीवन और छात्रों के कल्याण के प्रति उनके आजीवन समर्पण का सबूत है। केंद्रीय कैबिनेट में उनके साथ काम करते हुए, मैंने भारत के शिक्षा तंत्र को मजबूत करने और हर फैसले के केंद्र में लाखों युवा छात्रों को रखने के प्रति उनकी सच्ची निष्ठा देखी है। इतने अहम सेक्टर का नेतृत्व करने के लिए बहुत ज्यादा लगन की जरूरत होती है और उन्होंने इसे हिम्मत और साफ विजन के साथ अपनाया। आपकी लगातार सेवा, सुधारों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और एक मजबूत भारत बनाने में आपके योगदान के लिए आपका धन्यवाद। मैं कामना करता हूं कि आप इसी जोश और ईमानदारी के साथ देश की सेवा करते रहें।''

गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का पद छोड़ दिया है। उनका यह फैसला उसी जिम्मेदारी की भावना को दिखाता है जो उनके चार दशकों के सार्वजनिक जीवन की पहचान रही है। छात्र राजनीति में अपने शुरुआती दिनों से लेकर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय का कामकाज संभालने, उज्ज्वला योजना के जरिए करोड़ों घरों तक पहुंचने और बाद में शिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व करने तक, उन्होंने पूरे भरोसे और अथक ऊर्जा के साथ देश की सेवा की है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उनके नेतृत्व ने हमारे शिक्षा तंत्र पर एक गहरी छाप छोड़ी है। मैं उनकी बरसों की समर्पित सेवा के लिए धन्यवाद देता हूं। पीएम मोदी के नेतृत्व में, मुझे पूरा भरोसा है कि आप 'विकसित भारत' के निर्माण में अपना योगदान देते रहेंगे।

भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान ने पद संभालने से बहुत पहले ही, उनका सफर छात्र आंदोलनों और युवाओं की भागीदारी से गहराई से जुड़ा हुआ था। उस अनुभव ने उन्हें युवा भारतीयों की आकांक्षाओं, चुनौतियों और महत्वाकांक्षाओं की गहरी समझ दी। अपने पूरे सार्वजनिक जीवन में, वे इस विश्वास पर अडिग रहे कि शिक्षा सामाजिक बदलाव और राष्ट्रीय प्रगति का सबसे शक्तिशाली साधन है। शिक्षा मंत्रालय का नेतृत्व करना सरकार की सबसे चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। इसके लिए देश को भविष्य के लिए तैयार करते हुए लाखों छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों और संस्थानों के हितों में संतुलन बनाना पड़ता है। धर्मेंद्र प्रधान ने इस जिम्मेदारी को पूरे विश्वास, समर्पण और दूरदर्शी सोच के साथ निभाया। उनके कार्यकाल में भारत के शिक्षा तंत्र को मजबूत करने, सार्थक सुधारों को बढ़ावा देने और यह सुनिश्चित करने के लगातार प्रयास किए गए कि शिक्षा भारत की विकास यात्रा के केंद्र में बनी रहे।

उन्होंने आगे लिखा कि लाखों लोगों से जुड़ी किसी भी शिक्षा प्रणाली में चुनौतियां तो होती ही हैं। हर पीढ़ी को संस्थानों को बेहतर बनाने, जवाबदेही मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करना चाहिए कि जो लोग व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें सजा मिले। साथ ही, उन लोगों के ईमानदार प्रयासों को पहचानना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जो मजबूत संस्थान बनाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर अवसर पैदा करने के लिए खुद को समर्पित करते हैं। सार्वजनिक पद तो अस्थायी होता है, लेकिन उस कार्यकाल के दौरान पोषित मूल्य, विचार और संस्थान हमेशा बने रहते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में धर्मेंद्र प्रधान का योगदान और छात्र आंदोलनों के साथ उनका आजीवन जुड़ाव उनकी सार्वजनिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा। उनके वर्षों की समर्पित सेवा, भारत के छात्रों के प्रति आपकी अटूट प्रतिबद्धता और शिक्षा की बदलाव लाने वाली शक्ति में आपके विश्वास के लिए आपका धन्यवाद।

राज्यसभा सांसद रेखा शर्मा ने लिखा कि एक मजबूत राष्ट्र की नींव बेहतरीन शिक्षा से ही संभव है, और धर्मेंद्र प्रधान ने बतौर शिक्षा मंत्री इस विचार को चरितार्थ किया। छात्र आंदोलनों से मिले उनके अनुभव ने हमेशा युवाओं की उम्मीदों को आवाज दी। उन्होंने शिक्षा को सिर्फ एक विभाग नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण का संकल्प माना। शिक्षा क्षेत्र में दूरगामी बदलाव लाने और एक नई दिशा तय करने के लिए उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। आज जब वे अपने इस पद से आगे बढ़ रहे हैं, हम उनके समर्पण और अथक परिश्रम का हृदय से अभिनंदन करते हैं।

भाजपा सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी ने एक्स पोस्ट में लिखा कि शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने पूरे देश में एक अमिट छाप छोड़ी है। शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की दिशा में बड़े कदम बढ़ाए। व्यक्ति केवल शिक्षित ही नहीं हो बल्कि समग्र और संपूर्ण हो, शिक्षा की धारा को इसी ओर मोड़ दिया। प्रधान ने शिक्षा मंत्री के रूप में पूरी निष्ठा, समर्पण, प्रतिबद्धता, संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ भारतीय शिक्षा व्यवस्था को एक नई और प्रगतिशील दिशा दी है। शिक्षा में नैतिक मूल्यों, चरित्र निर्माण और नागरिक कर्तव्यों को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया। उनके कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों और योगदान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सफल क्रियान्वयन शामिल है जो आने वाली पीढ़ियों को दीर्घकालीन सोच के साथ राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार करता है।

उन्होंने आगे लिखा कि शिक्षा मंत्री के साथ-साथ कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री होने के नाते उन्होंने दोनों क्षेत्रों को आपस में जोड़ा। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि बच्चे की शुरुआती शिक्षा उसकी मातृभाषा में हो, जिससे उसकी मौलिक सोच का विकास हो सके। इंजीनियरिंग और चिकित्सा जैसे तकनीकी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई भी भारतीय भाषाओं में शुरू करने की ऐतिहासिक पहल की। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए डिजिटल तकनीकों जैसे- स्वयं, दीक्षा पोर्टल का विस्तार किया। पूरा देश प्रधान के प्रति आभारी है कि उनके प्रयासों ने भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाने की दिशा में एक मजबूत आधारशिला रखी है और अपने दायित्वों को सफलतापूर्वक निभाया है।

--आईएएनएस

डीकेएम/एबीएम

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