Samachar Nama
×

धर्मांतरण विरोधी कानून सकारात्मक कदम, जबरन धर्म परिवर्तन गैरकानूनी: रामदास अठावले

धर्मांतरण विरोधी कानून सकारात्मक कदम, जबरन धर्म परिवर्तन गैरकानूनी: रामदास अठावले
धर्मांतरण विरोधी कानून सकारात्मक कदम, जबरन धर्म परिवर्तन गैरकानूनी: रामदास अठावले

मुंबई, 28 अगस्त (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष रामदास अठावले ने धर्मांतरण विरोधी कानून, नेपाल में बाढ़, आरक्षण, राहुल गांधी के बयानों और महिला आरक्षण विधेयक समेत कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।

धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर केंद्रीय मंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष रामदास अठावले ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है।

उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपनी इच्छा से धर्म बदलने का अधिकार देता है लेकिन जबरन, दबाव या किसी प्रकार का लालच देकर धर्म परिवर्तन कराना कानून के खिलाफ है। ऐसे मामलों से निपटने के लिए सरकार की ओर से कानून लाया जाना अच्छी बात है।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ पर चिंता जताते हुए अठावले ने कहा कि बाढ़ से भारी नुकसान हुआ है। कई लोगों की जान चली गई है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। उन्होंने बताया कि नेपाल में बचाव और राहत कार्य जारी हैं। महाराष्ट्र समेत भारत के विभिन्न हिस्सों से नेपाल गए कुछ पर्यटक भी वहां फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार फंसे हुए पर्यटकों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास कर रही है।

राहुल गांधी द्वारा युवाओं से बातचीत और कथित तौर पर किए गए दावों पर अठावले ने कहा कि राहुल गांधी को युवाओं से बातचीत करने का पूरा अधिकार है, लेकिन झूठे दावे फैलाना उचित नहीं है। उन्होंने कांग्रेस के लंबे शासन का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि उस दौरान महिलाओं और युवाओं को न्याय क्यों नहीं मिला।

आरक्षण के मुद्दे पर अठावले ने कहा कि आरक्षण संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने बताया कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने संविधान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण का प्रावधान किया था। बाद में वी.पी. सिंह सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया। मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण दिया है। इसलिए आरक्षण का विरोध करने का कोई औचित्य नहीं है।

अठावले ने कहा कि उनकी पार्टी का स्पष्ट रुख है कि दलितों, आदिवासियों और ओबीसी के आरक्षण को समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग आरक्षण को भी बनाए रखने की बात कही।

महिला आरक्षण और संसद के विशेष सत्र के मुद्दे पर अठावले ने कहा कि विपक्ष विशेष सत्र बुलाने की मांग कर रहा है और सरकार भी इस पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर भी निर्णय लिया जाना बाकी है।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम

Share this story