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देश में 28 मई को बकरीद, धार्मिक गुरुओं ने भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का दिया संदेश

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। देशभर में गुरुवार को ईद-उल-अजहा का त्योहार मनाया जाएगा। इस मौके पर विभिन्न धार्मिक नेताओं और समुदायों के प्रतिनिधियों ने लोगों को भाईचारे, त्याग और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया है।
देश में 28 मई को बकरीद, धार्मिक गुरुओं ने भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का दिया संदेश

नई दिल्ली, 27 मई (आईएएनएस)। देशभर में गुरुवार को ईद-उल-अजहा का त्योहार मनाया जाएगा। इस मौके पर विभिन्न धार्मिक नेताओं और समुदायों के प्रतिनिधियों ने लोगों को भाईचारे, त्याग और सामाजिक सौहार्द का संदेश दिया है।

कोलकाता स्थित नखोदा मस्जिद के इमाम शफीक कासमी ने ईद-उल-अजहा के अवसर पर सभी धर्मों के लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ईद और बकरीद केवल धार्मिक त्योहार नहीं हैं, बल्कि त्याग, सेवा और भाईचारे का संदेश का पर्व है।

इमाम शफीक कासमी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “हम पूरे देश के हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय को बकरीद की बधाई देते हैं। बकरीद पर मवेशियों की कुर्बानी केवल एक प्रतीक है। असली कुर्बानी अपने अहंकार, स्वार्थ और बुराइयों को त्यागने में है। यदि हम अपने भाई की तरक्की के लिए खुद पीछे हट जाएं, जरूरतमंदों की मदद करें और सच के लिए आवाज उठाएं, तो यही सच्ची कुर्बानी है।”

उन्होंने कहा कि यदि किसी की बात से दूसरे को ठेस पहुंचती हो तो शांत रहना और संयम बनाए रखना भी एक तरह की कुर्बानी है। उनके अनुसार, समाज में दिखावे के बजाय त्याग और इंसानियत की भावना को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

ईद-उल-अजहा से जुड़े पश्चिम बंगाल सरकार के नियमों पर प्रतिक्रिया देते हुए इमाम शफीक कासमी ने कहा कि वर्तमान में लागू किए गए नियम नए नहीं हैं, बल्कि पुराने कानूनों को ही सख्ती से लागू किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय कानून का सम्मान करता है और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के साथ त्योहार मनाने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, “अगर गोवंश की कुर्बानी की अनुमति नहीं है तो हम बकरे की कुर्बानी देकर बकरीद मनाएंगे। इसमें किसी प्रकार की चिंता की बात नहीं है। हमारा उद्देश्य शांति और भाईचारे के साथ त्योहार मनाना है।”

वहीं, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के सदस्य मौलाना एजाज कश्मीरी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को अपने धर्म के बारे में किसी अन्य से सीखने की आवश्यकता नहीं है। हम मुसलमान होने के नाते किसी दूसरे धर्म में हस्तक्षेप नहीं करते और न ही किसी को यह बताते हैं कि उन्हें अपने त्योहार कैसे मनाने चाहिए। सभी को अपने-अपने धर्म और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।”

देशभर में ईद-उल-अजहा को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और प्रशासन ने भी सुरक्षा एवं व्यवस्था को लेकर आवश्यक इंतजाम किए हैं।

--आईएएनएस

एसएके/डीकेपी

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