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देशभर के छात्रों ने नीट में दिखाई प्रतिभा, बिहार में तीन भाई-बहनों ने एकसाथ पास की परीक्षा

देशभर के छात्रों ने नीट में दिखाई प्रतिभा, बिहार में तीन भाई-बहनों ने एकसाथ पास की परीक्षा
देशभर के छात्रों ने नीट में दिखाई प्रतिभा, बिहार में तीन भाई-बहनों ने एकसाथ पास की परीक्षा

नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। नीट-यूजी के परिणाम आने के बाद देशभर से प्रतिभाशाली छात्रों की सफलता की कहानियां सामने आ रही हैं। बिहार के सहरसा जिले के तुलसियाही गांव में एक साधारण परिवार के तीन भाई-बहनों ने एक साथ नीट पास कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वहीं, झारखंड के गढ़वा जिले के ज्ञानेंद्र गर्व ने 676 अंक हासिल कर राज्य में टॉप किया है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश, पंजाब और तेलंगाना के छात्रों ने भी शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया है।

तुलसियाही गांव में एक साधारण परिवार के तीन सगे भाई-बहनों ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) में सफलता हासिल की। सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद तीनों भाई-बहनों ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर यह मुकाम हासिल किया है। सफल होने वालों में 22 वर्षीय रजनीश कुमार, 21 वर्षीय साक्षी कुमारी और 19 वर्षीय प्रहलाद कुमार शामिल हैं। तीनों ने शुरुआती पढ़ाई गांव के ही स्कूल से पूरी की।

रजनीश और साक्षी ने सीबीएसई बोर्ड से मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद बिहार बोर्ड से इंटरमीडिएट किया, जबकि सबसे छोटे भाई प्रहलाद ने मैट्रिक और इंटर दोनों परीक्षाएं बिहार बोर्ड से उत्तीर्ण कीं। नीट में रजनीश और साक्षी को तीसरे प्रयास में सफलता मिली, वहीं प्रहलाद ने अपने पहले ही प्रयास में परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया।

तीनों बच्चों के पिता रोहित कुमार गांव में छोटी सी किराना दुकान चलाते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं होने के बावजूद, उन्होंने बच्चों की शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी सीमित आय में भी बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए हर संभव प्रयास किया। बच्चों की सफलता पर मां पूनम देवी ने भावुक होते हुए बताया कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि उनके बच्चे अपनी मेहनत से परिवार का नाम रोशन करेंगे।

नीट में सफलता हासिल करने वाले प्रहलाद कुमार ने परीक्षा परिणाम समय पर जारी होने को लेकर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि पहले परीक्षा प्रक्रिया को लेकर छात्रों में जो चिंता थी, वह अब पारदर्शिता के कारण कम हुई है। प्रहलाद भविष्य में ऑर्थोपेडिक सर्जन बनकर मरीजों की सेवा करना चाहते हैं।

वहीं, साक्षी कुमारी ने बताया कि उन्होंने बड़े शहरों जैसे कोटा या पटना जाकर तैयारी नहीं की। उन्होंने अपने गृह जिले सहरसा में रहकर स्थानीय कोचिंग और स्वअध्ययन के माध्यम से तैयारी की। उनका सपना भविष्य में चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों की सेवा करना है।

सबसे बड़े भाई रजनीश कुमार ने कहा कि आर्थिक कमजोरी कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। उन्होंने सहरसा में रहकर ही तैयारी की और यह साबित किया कि अगर मेहनत और दृढ़ संकल्प हो तो लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

देशभर में नीट में कई अन्य छात्रों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है। झारखंड के गढ़वा जिले के ज्ञानेंद्र गर्व ने नीट में 676 अंक हासिल कर राज्य टॉपर बनने का गौरव हासिल किया। ज्ञानेंद्र गढ़वा के एसडीएम मयंक भूषण के पुत्र हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा रांची के डीएवी श्यामली स्कूल से पूरी की, जहां वह हमेशा बेहतर प्रदर्शन करते रहे।

नीट की पिछली परीक्षा रद्द होने के बाद ज्ञानेंद्र कुछ समय के लिए निराश हुए थे, लेकिन परिवार और दोस्तों के सहयोग से उन्होंने दोबारा तैयारी शुरू की और शानदार सफलता हासिल की। ज्ञानेंद्र ने कहा कि उनका लक्ष्य एक अच्छा डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है।

ज्ञानेंद्र के पिता मयंक भूषण ने बेटे की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि एक अभिभावक के लिए इससे बड़ी खुशी कोई नहीं हो सकती कि उसका बच्चा अपने लक्ष्य को हासिल करे। ज्ञानेंद्र बचपन से ही पढ़ाई में अच्छा रहा है और अब उसकी मेहनत का परिणाम सामने है।

देश के अन्य हिस्सों से भी नीट में शानदार प्रदर्शन की खबरें आई हैं। मध्य प्रदेश की आराध्या गर्ग ने ऑल इंडिया रैंक 110 हासिल की। पंजाब की भाविका गुप्ता ने एआईआर 56 प्राप्त किया, जबकि तेलंगाना के छात्रों ने भी शीर्ष रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा साबित की।

--आईएएनएस

एससीएच/एबीएम

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