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देश में अब पराली जलाने की समस्या हो रही खत्म, पराली से बन रहा इथेनॉल और बायो-सीएनजी : गडकरी

देश में अब पराली जलाने की समस्या हो रही खत्म, पराली से बन रहा इथेनॉल और बायो-सीएनजी : गडकरी
देश में अब पराली जलाने की समस्या हो रही खत्म, पराली से बन रहा इथेनॉल और बायो-सीएनजी : गडकरी

नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को दिल्ली विधानसभा के पहले स्पीकर चार्टी लाल गोयल की 99वीं जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण की चुनौतियों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अब देश में पराली जलाने की समस्या खत्म हो रही है। इससे हम लोग इथेनॉल और बायो-सीएनजी बनवा रहे हैं, आने वाले दिनों में इसकी समस्या पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि व्यक्ति कितने वर्षों तक जीवित रहा, इससे अधिक महत्वपूर्ण यह है कि उसने अपना जीवन किस तरह जिया और समाज के लिए क्या योगदान दिया। जन्म लेने वाले हर व्यक्ति की मृत्यु निश्चित है और यह एक सार्वभौमिक नियम है। किसी व्यक्ति का वास्तविक मूल्यांकन उसके जीवन की अवधि से नहीं, बल्कि इस बात से होता है कि उसने अपने जीवन को किस उद्देश्य और तरीके से जिया।

कार्यक्रम में उन्होंने उस स्थान के बदलाव की भी सराहना की, जहां पहले कबाड़ का ढेर हुआ करता था और अब उसे एक सुंदर बगीचे में बदल दिया गया है। उन्होंने इसे कबाड़खाने के कायाकल्प का उदाहरण बताते हुए कहा कि इस तरह के बदलाव समाज और पर्यावरण, दोनों के लिए सकारात्मक हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से वह पारिस्थितिकी और पर्यावरण के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम कर रहे हैं। आज मानव समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में पर्यावरण का लगातार क्षरण भी शामिल है। पर्यावरण और पारिस्थितिकी की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का पहला कर्तव्य होना चाहिए।

गडकरी ने वायु, जल और ध्वनि प्रदूषण को गंभीर चिंता का विषय बताया। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के ये तीनों रूप लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं और जीवन प्रत्याशा को कम करने में भी भूमिका निभा रहे हैं। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रदूषण का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी को लंबे समय तक प्रदूषण की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ा है लेकिन अब स्थिति में बदलाव आना शुरू हुआ है।

गडकरी ने पराली जलाने की समस्या के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि पहले पंजाब और हरियाणा में बड़े पैमाने पर पराली जलाने के कारण दिल्ली के प्रदूषण पर असर पड़ता था। इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा पर आधारित नीतियों को बढ़ावा दिया।

उन्होंने कहा कि अब पराली को कचरे के बजाय उपयोगी संसाधन के रूप में देखा जा रहा है। इसका इस्तेमाल गैस बनाने के साथ-साथ सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल (एसएएफ) तैयार करने में भी किया जा रहा है। कचरे और कृषि अवशेषों को आर्थिक संसाधन में बदलने की ऐसी पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।

--आईएएनएस

एसएके/पीएम

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