राजस्थान में रेल सेवाओं के विस्तार को लेकर नई ट्रेनों की मांग अब संसद तक पहुंच गई है। लोकसभा और राज्यसभा में विभिन्न जनप्रतिनिधियों ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के लिए नई ट्रेनों के संचालन की मांग उठाई है। उन्होंने तर्क दिया कि बढ़ती आबादी, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को देखते हुए मौजूदा रेल सेवाएं पर्याप्त नहीं हैं।
सांसदों ने सदन में कहा कि राजस्थान एक प्रमुख पर्यटन राज्य है, जहां हर वर्ष लाखों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, जैसलमेर और बीकानेर जैसे प्रमुख शहरों के लिए ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। विशेष रूप से सीमावर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
जनप्रतिनिधियों ने यह भी मुद्दा उठाया कि कई रूट्स पर ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ रहती है, जिससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। त्योहारों और पर्यटन सीजन के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। ऐसे में नई ट्रेनों के संचालन और मौजूदा ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की जरूरत बताई गई।
इसके अलावा, कुछ सांसदों ने प्रदेश के छोटे शहरों और कस्बों को सीधे रेल नेटवर्क से जोड़ने की मांग भी रखी। उनका कहना है कि इससे न केवल लोगों की आवाजाही आसान होगी, बल्कि स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
रेल मंत्रालय की ओर से इस पर सकारात्मक रुख के संकेत दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की मांग, रूट की व्यवहार्यता और संसाधनों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा। आवश्यकतानुसार सर्वे और तकनीकी अध्ययन के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान में रेल नेटवर्क का विस्तार होने से पर्यटन, उद्योग और कृषि क्षेत्र को सीधा लाभ मिलेगा। साथ ही, प्रदेश के दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
कुल मिलाकर, संसद में उठी यह मांग प्रदेश में रेल सुविधाओं के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे आने वाले समय में यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।

