दिल्ली: वाहन चोरी सिंडिकेट का भंडाफोड़, 11 लग्जरी कार के साथ दो आरोपी गिरफ्तार
नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस की एंटी-ऑटो-थेफ्ट स्क्वॉड ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय वाहन चोरी सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए दो कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के साथ दिल्ली, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से चोरी की गई कुल 11 लग्जरी कार बरामद की गई हैं, जिन्हें फर्जी दस्तावेजों के जरिए दोबारा रजिस्टर कर बेचा जा रहा था।
इस मामले की शुरुआत 28 दिसंबर 2025 को हुई, जब थाना जामिया नगर में ई-एफआईआर संख्या 034942/2025 धारा 305 (बी) बीएनएस के तहत दर्ज की गई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उसकी मारुति एस-प्रेसो कार 27 और 28 दिसंबर की दरम्यानी रात जामिया नगर इलाके से चोरी हो गई थी। शुरुआती जांच में ही पुलिस को इस चोरी के पीछे किसी संगठित गिरोह की आशंका हुई, जिसके बाद मामले की जांच एएटीए दक्षिण-पूर्व जिला को सौंपी गई।
1 जनवरी को एसआई जितेंद्र और हेड कांस्टेबल शेर सिंह को एक विश्वसनीय गुप्त सूचना मिली कि उत्तर प्रदेश, मुंबई, पुणे और महाराष्ट्र के अन्य इलाकों में सक्रिय चोरी के वाहनों का एक बड़ा रिसीवर कई लग्जरी गाड़ियां अपने कब्जे में रखे हुए है और इस केस से जुड़ी चोरी की गई एस-प्रेसो कार भी उसी के पास है। तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र की मदद से इस सूचना को पुख्ता किया गया। इसके बाद निरीक्षक अजय दलाल की निगरानी और एसीपी ऑप्स/एसईडी रतन लाल के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम गठित की गई।
टीम ने ठोस इनपुट के आधार पर मुंबई के बांद्रा इलाके से कुणाल सुभाष जायसवाल नामक आरोपी को गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी के साथ दिल्ली से चोरी की गई एक हुंडई क्रेटा कार बरामद की गई और आरोपी को पुलिस रिमांड पर लिया गया। पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर 3 जनवरी को टीम का एक हिस्सा मुंबई के धारावी इलाके पहुंचा, जहां सेकेंड हैंड कारों की खरीद-फरोख्त का कारोबार करने वाले 25 वर्षीय मोहम्मद अमान को गिरफ्तार किया गया। उसके कब्जे से भी एक चोरी की गई क्रेटा कार बरामद हुई, जो दिल्ली से चोरी होना पुष्टि हुई।
जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपी कुणाल एक संगठित अंतरराज्यीय वाहन चोरी और धोखाधड़ी सिंडिकेट का मास्टरमाइंड है। वह चोरी की गई, लोन डिफॉल्ट और दुर्घटनाग्रस्त (टोटल लॉस) गाड़ियों को हासिल कर उनके चेसिस नंबर से छेड़छाड़ करता था। वाहनों के चेसिस नंबर का दुरुपयोग कर फर्जी सेल लेटर और नकली बैंक एनओसी के आधार पर इन गाड़ियों का दोबारा पंजीकरण कराया जाता था। इसके बाद इन गाड़ियों को सस्ते दामों पर भोले-भाले ग्राहकों को बेच दिया जाता था।
पूछताछ में कुणाल ने खुलासा किया कि उसने कई चोरी की गाड़ियां फर्जी रजिस्ट्रेशन के साथ पुणे निवासी दर्शन, मुंबई निवासी अमान, कोल्हापुर निवासी नीम और जालना निवासी शेख काशिफ को बेची थीं। उसने यह भी बताया कि वाहन चोरी का काम बुलंदशहर निवासी काशिफ और हसन करते थे, जिनमें से हसन फिलहाल उत्तर प्रदेश की जेल में बंद है।
जांच के दौरान आरोपियों की निशानदेही पर महाराष्ट्र के पुणे, कोल्हापुर और जालना से कई चोरी की गई गाड़ियां बरामद की गईं। सत्यापन में पाया गया कि इन सभी वाहनों के चेसिस नंबर से छेड़छाड़ की गई थी और इन्हें फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर रजिस्टर कराया गया था, ताकि इनके चोरी होने की पहचान छुपाई जा सके। 20 जनवरी 2026 को इस गिरोह के मुख्य वाहन चोर काशिफ, निवासी बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश), को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उसकी निशानदेही पर एक चोरी की गई मारुति वैगन-आर कार बरामद की गई। फिलहाल इस केस में कुल 11 चोरी की गई और धोखाधड़ी से रजिस्टर की गई गाड़ियों की बरामदगी हो चुकी है।
पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और आगे और भी गाड़ियों की बरामदगी की संभावना है। जांच में यह भी सामने आया है कि यह सिंडिकेट बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। दिल्ली से चोरी की गई गाड़ियों को महाराष्ट्र ले जाया जाता था, जहां उनके मूल चेसिस नंबर बदल दिए जाते थे। बीमा कंपनियों से हासिल किए गए दस्तावेजों और फर्जी कागजात के जरिए इन वाहनों को वैध दिखाकर बाजार में उतारा जाता था।
गिरफ्तार आरोपी कुणाल सुभाष जायसवाल (23) मुंबई का रहने वाला है और ग्रेजुएट है। वह इससे पहले भी क्राइम ब्रांच के एक गंभीर मामले में शामिल रह चुका है। वहीं, बुलंदशहर निवासी काशिफ पर पहले से ही वाहन चोरी, एटीएम लूट और अन्य आपराधिक मामलों में कई मुकदमे दर्ज हैं और उसका आपराधिक नेटवर्क पारिवारिक स्तर तक फैला हुआ है। इस मामले में आगे जांच अभी जारी है।
--आईएएनएस
पीएसके

