Delhi Pollution: प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- जितनी ज्यादा पाबंदियां लगाएंगे, उतना बढ़ेगा उल्लंघन; AQI 391 पहुंचा
दिल्ली-NCR में लगातार बिगड़ती हवा और बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अहम सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने प्रदूषण रोकने के लिए लगाए जा रहे प्रतिबंधों और सख्त नियमों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि केवल आदेश जारी करने और पाबंदियां लगाने से प्रदूषण की समस्या खत्म नहीं होगी। जितने ज्यादा आदेश और प्रतिबंध लगाए जाएंगे, उनके उल्लंघन की आशंका भी उतनी ही बढ़ सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदूषण से निपटने के लिए लोगों को जागरूक करना और उनके व्यवहार में बदलाव लाना बेहद जरूरी है। अदालत का मानना है कि जब तक आम लोग खुद पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक केवल सरकारी आदेशों से हालात सुधारना मुश्किल होगा।इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने की। कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में वायु गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है और AQI का स्तर 400 के करीब पहुंचना बेहद चिंताजनक है। मामले की अगली सुनवाई दिवाली की छुट्टियों के बाद 16 नवंबर को होगी।
CJI सूर्यकांत ने प्रदूषण को लेकर उठाए ये 5 बड़े सवाल
1. केवल सख्त नियम बनाने से नहीं सुधरेंगे हालात
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण रोकने के लिए लगातार नए आदेश और पाबंदियां लगाई जा रही हैं, लेकिन इनका वास्तविक असर कितना हो रहा है, इस पर विचार करना जरूरी है। अदालत ने लोगों को जागरूक करने और उनकी आदतों में बदलाव लाने की जरूरत बताई।
2. गाड़ियों से निकलने वाला धुआं बड़ी समस्या
कोर्ट ने दिल्ली-NCR में वाहनों की बढ़ती संख्या और उनसे निकलने वाले धुएं को प्रदूषण की प्रमुख वजहों में शामिल बताया। अदालत ने सड़कों पर चलने वाले वाहनों की संख्या और उनके प्रकार पर ध्यान देने की बात कही।
3. AQI 400 तक पहुंचना बेहद चिंताजनक
CJI ने कहा कि प्रदूषण को लेकर लगातार चर्चा और सुझाव दिए जा रहे हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 तक पहुंच रहा है। यह स्थिति बताती है कि मौजूदा प्रयासों को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।
4. किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए जागरूक करें
अदालत ने पराली जलाने की समस्या पर भी ध्यान दिलाया। कोर्ट ने कहा कि किसानों को खेतों में फसल अवशेष जलाने के बजाय मशीनों और दूसरे वैकल्पिक तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए।
5. प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर गरीबों पर
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदूषण रोकने के लिए जिम्मेदार एजेंसियों के प्रयासों पर भी सवाल उठाए। CJI ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा, 'उम्मीद है आप सभी दिल्ली के मौसम का आनंद ले रहे होंगे।' अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि खराब हवा का सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों को उठाना पड़ता है।
प्रदूषण रोकने के लिए 5 प्रमुख क्षेत्रों पर बनाए गए नियम
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि प्रदूषण रोकने के लिए पांच प्रमुख क्षेत्रों पर नियम और नियंत्रण के उपाय लागू किए गए हैं।
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औद्योगिक प्रदूषण: फैक्ट्रियों और उद्योगों से निकलने वाले धुएं पर नियंत्रण।
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वाहनों का प्रदूषण: गाड़ियों से निकलने वाले जहरीले धुएं को कम करने के उपाय।
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निर्माण कार्य: निर्माण और तोड़फोड़ के दौरान उड़ने वाली धूल पर रोक।
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सड़कों की धूल: सड़कों पर जमा धूल को नियंत्रित करने के लिए सफाई और अन्य उपाय।
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पराली जलाना: किसानों को फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि गुरुवार को दिल्ली के कुल प्रदूषण में पराली जलाने की हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे और इस संबंध में कुछ आदेश जारी किए जाएंगे।
दिल्ली में AQI 391, कई इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी में
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बीच दिल्ली की हवा की स्थिति भी लगातार खराब बनी हुई है। शुक्रवार सुबह राजधानी के कई इलाकों में घना धुंध और स्मॉग देखने को मिला। शहर का औसत AQI 391 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है।दिल्ली के 59 निगरानी केंद्रों में से 30 केंद्रों पर शुक्रवार सुबह 9 बजे AQI 400 के पार पहुंच गया था। इन इलाकों में हवा गंभीर श्रेणी में दर्ज की गई।सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, रोहिणी में सबसे ज्यादा AQI 475 रिकॉर्ड किया गया, जबकि IIT दिल्ली के आसपास वायु गुणवत्ता सूचकांक 472 रहा। बाकी निगरानी केंद्रों पर भी हवा की स्थिति खराब से बेहद खराब श्रेणी में बनी हुई थी।
16 नवंबर को फिर होगी सुनवाई, प्रदूषण नियंत्रण पर आ सकते हैं अहम निर्देश
दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या हर साल सर्दियों के दौरान गंभीर रूप ले लेती है। वाहनों का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और पराली जलाने जैसी गतिविधियां इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि केवल प्रतिबंध लगाने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकलेगा। इसके लिए सरकार, संबंधित एजेंसियों, किसानों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।अब इस मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। ऐसे में नजर रहेगी कि अदालत प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कौन से नए निर्देश जारी करती है और दिल्ली-NCR की बिगड़ती हवा को सुधारने के लिए सरकार क्या ठोस कदम उठाती है।

