दिल्ली पुलिस का दावा- CJP प्रदर्शन में हत्या समेत गंभीर मामलों के आरोपी भी थे शामिल, वीडियो में जाने 2,873 लोगों का मिला आपराधिक रिकॉर्ड
20 जुलाई को आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 'संसद चलो मार्च' को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ा दावा किया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल लोगों की जांच के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की पहचान हुई, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस का कहना है कि इनकी पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) और अन्य तकनीकी माध्यमों से की गई।दिल्ली पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल 2,873 लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड मिला। इनमें 989 लोगों पर हत्या, यौन अपराध, पॉक्सो, लूट और अन्य गंभीर धाराओं में मामले दर्ज होने का दावा किया गया है। पुलिस का यह भी कहना है कि प्रदर्शन में हत्या के 101 आरोपी भी शामिल थे।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की पहचान तकनीकी विश्लेषण और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर की गई। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस तरह की जांच आवश्यक है और मामले से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।गौरतलब है कि 20 जुलाई को CJP ने संसद की ओर मार्च निकाला था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
दिल्ली पुलिस का दावा है कि इस झड़प में 118 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इनमें स्पेशल कमिश्नर, जॉइंट कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, डीसीपी, एडिशनल डीसीपी और एसीपी रैंक के अधिकारी शामिल थे। कई महिला पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी दी गई है।
वहीं, इस घटना में करीब 60 प्रदर्शनकारियों के घायल होने की भी सूचना सामने आई थी। पुलिस और प्रदर्शनकारियों, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर बल प्रयोग और हिंसा के आरोप लगाए थे। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मामला न्यायिक समीक्षा और सार्वजनिक बहस का विषय बना हुआ है।उल्लेखनीय है कि 25 जुलाई की शाम तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद CJP ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की थी।
हालांकि, दिल्ली पुलिस के ये दावे स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि या अदालत के निष्कर्ष नहीं हैं। जिन लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की बात कही गई है, उनमें से कई मामलों में न्यायिक प्रक्रिया जारी हो सकती है। ऐसे में केवल मामला दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जाता। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण को लेकर जांच और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

