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Delhi PG Safety: बाहर से चमचमाती 6 मंजिला बिल्डिंग, अंदर सुरक्षा को लेकर सवाल; छात्रों की शिफ्टिंग से मचा हड़कंप
 

Delhi PG Safety: बाहर से चमचमाती 6 मंजिला बिल्डिंग, अंदर सुरक्षा को लेकर सवाल; छात्रों की शिफ्टिंग से मचा हड़कंप

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए पीजी हादसे के बाद जर्जर हॉस्टल और इमारतों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई है। इसी कड़ी में हादसे के आसपास मौजूद कुछ ऐसी इमारतों पर भी कार्रवाई की जा रही है, जिन्हें असुरक्षित या जर्जर माना जा रहा है। इनमें एक पीजी ऐसी भी है, जिसे जल्द तोड़ा जाना है। इसके चलते वहां रह रहे छात्रों को दूसरे पीजी में शिफ्ट किया जा रहा है।
हालांकि, छात्रों को जिस नए पीजी में भेजा जा रहा है, उसकी लोकेशन और दूसरी जानकारी साझा नहीं करने को कहा गया। इसके बाद नए ठिकाने को लेकर सवाल खड़े होने लगे।


पुराने PG से छात्रों को कहां ले जाया गया?
छात्रों के नए ठिकाने की जानकारी सामने नहीं आने के बीच एबीपी न्यूज की टीम ने पुराने पीजी से निकल रहे छात्रों के ऑटो का पीछा किया। टीम उस इमारत तक पहुंची, जहां छात्रों को शिफ्ट किया जा रहा था।
बाहर से यह करीब छह मंजिला इमारत देखने में नई और आकर्षक नजर आती है। लेकिन अंदर की स्थिति और बिल्डिंग की मजबूती को लेकर कई सवाल सामने आए हैं।


पुरानी इमारत पर बनी नई मंजिलों का दावा
नई बिल्डिंग को लेकर वहां रहने वाले एक व्यक्ति ने गंभीर दावा किया। उसका कहना है कि यह इमारत पहले काफी जर्जर हालत में थी और पुराने मालिक ने इसे बेच दिया था। इसके बाद नए मालिकों ने कथित तौर पर तीन मंजिला पुरानी संरचना को पूरी तरह गिराकर नया निर्माण करने के बजाय उसके ऊपर तीन और मंजिलें बना दीं।
निवासी के मुताबिक, पुरानी संरचना पर मुख्य रूप से प्लास्टर और पेंट किया गया और इसके बाद इमारत को नई शक्ल दी गई। उसका यह भी दावा है कि बिल्डिंग की मजबूती को लेकर चिंता के चलते उन्होंने करीब एक साल पहले इसे खाली कर दिया था।
एक अन्य दावा यह है कि पूरी बिल्डिंग को महज करीब 15 दिनों में तैयार कर दिया गया था। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि एबीपी न्यूज की ओर से नहीं की गई है।


छह मंजिला इमारत की सुरक्षा जांच पर सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल बिल्डिंग की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर है। अगर पुरानी तीन मंजिला संरचना के ऊपर कथित तौर पर तीन अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई हैं, तो क्या निर्माण से पहले और बाद में इमारत की मजबूती की जरूरी जांच की गई?
सवाल यह भी है कि अगर बिल्डिंग को लेकर किसी तरह की सुरक्षा संबंधी आशंका है तो उसे अब तक सील क्यों नहीं किया गया। बाहर से आधुनिक और नई दिखाई देने वाली इमारत अंदर से कितनी सुरक्षित है, यह जांच का अहम विषय बन गया है।


कमरों की हालत ने भी बढ़ाई चिंता
एबीपी न्यूज की टीम ने जब इमारत के अंदर जाकर कमरों की स्थिति कैमरे पर दिखाने की कोशिश की, तो वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और एक व्यक्ति ने कैमरे पर कमरों को दिखाने से रोकने का प्रयास किया। यह व्यक्ति कथित तौर पर एजेंट बताया गया।
अंदर दिखाए गए कमरों में जगह काफी सीमित नजर आई। बताया गया कि इलाके में एक बेड के लिए करीब 15 से 16 हजार रुपये तक किराया लिया जा रहा है। कमरों में बुनियादी सुविधाओं के तौर पर अलमारी, टेबल और अन्य सामान दिखाई दिए, लेकिन उपलब्ध जगह काफी कम नजर आई।
छात्रों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
सत्य निकेतन हादसे के बाद जर्जर इमारतों पर कार्रवाई का उद्देश्य छात्रों और दूसरे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। ऐसे में किसी असुरक्षित घोषित या सवालों के घेरे में आई इमारत से छात्रों को निकालकर दूसरी जगह भेजना तभी पर्याप्त माना जाएगा, जब नए ठिकाने की सुरक्षा भी पूरी तरह सुनिश्चित हो।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि छात्रों को पुराने पीजी से हटाकर नए पीजी में क्यों भेजा गया, बल्कि यह भी है कि जिस छह मंजिला इमारत में उन्हें रखा जा रहा है, क्या उसकी संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा मानकों की पूरी जांच हुई है? छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए इस सवाल का स्पष्ट जवाब बेहद जरूरी है।
 

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