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दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब, बोले- बढ़ी हुई कीमतों पर कोई खरीदारी नहीं

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब, बोले- बढ़ी हुई कीमतों पर कोई खरीदारी नहीं
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने विपक्ष के आरोपों का दिया जवाब, बोले- बढ़ी हुई कीमतों पर कोई खरीदारी नहीं

नई दिल्ली, 13 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री पंकज कुमार सिंह ने गुरुवार को कहा कि विपक्ष द्वारा सरकारी अस्‍पतालों में गड़बड़ी के आरोप लगाने के बाद स्वास्थ्य सचिव से ओआरएस, बेडशीट, तकिए और एक्स-रे मशीनों की खरीद पर 17 अगस्त तक रिपोर्ट मांगी है।

मंत्री ने आईएएनएस को दिए एक इंटरव्यू में कहा, "हमने स्वास्थ्य सचिव से मई में 15 रुपए प्रति पैकेट की दर से खरीदे गए ओआरएस पैकेट के बारे में जानकारी मांगी है। साथ ही, अस्पतालों के लिए खरीदी गई 16 लाख बेडशीट कौन सी हैं?"

पंकज कुमार सिंह ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार, ओआरएस पैकेट 8.70 रुपए प्रति पैकेट की दर से खरीदे गए थे, "लेकिन मैंने पूछा है कि 15 रुपए प्रति ओआरएस पैकेट की कथित कीमत की बात कहां से आई"।

उन्होंने कहा, "मई में जब पूरे देश में ओआरएस पैकेट 8.75 रुपए प्रति पैकेट की कीमत पर खरीदे जा रहे थे, तब हमने उन्हें 8.70 रुपए प्रति पैकेट की दर से खरीदा। मैंने स्वास्थ्य सचिव से जवाब मांगा है कि क्या ओआरएस पैकेट 15 रुपए प्रति पैकेट की दर से खरीदे गए हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "हमारा मकसद जन-कल्याण है। हम जानना चाहते हैं कि वे कौन सी कथित अनियमितताएं हैं जिनके तहत ओआरएस पैकेट 15 रुपए प्रति पैकेट की दर से खरीदे गए। अगर यह सच है तो स्वास्थ्य सचिव को अपनी रिपोर्ट में इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए।"

स्वास्थ्य मंत्री ने आईएएनएस को बताया कि उन्होंने सचिव से यह बताने को कहा है कि वे बेडशीट – जिन्हें आमतौर पर एम्‍स 400 रुपए प्रति शीट के हिसाब से खरीदता है, 120 रुपए प्रति शीट के हिसाब से कहां उपलब्ध हैं और कौन से अस्पताल ऐसी बेडशीट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

एक्स-रे मशीनों की खरीद के बारे में उन्होंने कहा, "मैंने सचिव से यह बताने को कहा है कि क्या 33 लाख रुपए की जो एक्स-रे मशीनें हमने खरीदी हैं, वे 10 लाख रुपए प्रति मशीन की दर से उपलब्ध हैं।"

उन्होंने कहा कि अधिकारी से यह पुष्टि करने को कहा गया है कि जिन 10 लाख रुपए की एक्स-रे मशीनों की बात हो रही है, "क्या वे उसी स्पेसिफिकेशन और कंपनी की हैं, जिनकी 33 लाख रुपए की मशीनें हमने खरीदी हैं"।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "मैंने उन मेडिकल उपकरणों की जानकारी भी मांगी है जो कोविड के दौरान खरीदे गए थे और बिना इस्तेमाल के ही फेंक दिए गए।"

उन्होंने कहा कि उन्होंने उन 15 मेडिकल उपकरण और दवा सप्लाई करने वाली कंपनियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी मांगी है, जिन पर एंटी-करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने 2024 में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे।

पंकज कुमार सिंह ने कहा कि कोर्ट ने भी उन उपकरणों के बारे में जानकारी मांगी है जो कोरोना महामारी के दौरान खरीदे गए थे और स्टाफ की कमी के कारण बिना इस्तेमाल के ही फेंक दिए गए।

उन्होंने कहा कि सेक्रेटरी से यह भी बताने को कहा गया है कि एसीबी की 2024 की शिकायत के सिलसिले में गड़बड़ी के लिए कौन दोषी पाया गया और उस व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गड़बड़ी के दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जो लोग बिना किसी तथ्य या सबूत के बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं, उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने विपक्षी आम आदमी पार्टी (आप) के इन खास आरोपों पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि स्वास्थ्य विभाग में 650 करोड़ रुपये का खरीद घोटाला हुआ है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की आदत है कि वे झूठे आरोप लगाते हैं और बिना कोई सबूत दिए या अपने दावे को साबित किए बिना ही भाग जाते हैं।

आप विधायकों ने हाल ही में दावा किया था कि ओआरएस के पैकेट और पोर्टेबल एक्स-रे मशीन जैसे मेडिकल उपकरण 3-4 गुना ज्‍यादा कीमत पर खरीदे गए थे।

--आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी

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