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दिल्ली में एसआईआर के नाम पर गरीब, दलित और प्रवासी मतदाताओं के वोट काटे जा रहे: आप

दिल्ली में एसआईआर के नाम पर गरीब, दलित और प्रवासी मतदाताओं के वोट काटे जा रहे: आप
दिल्ली में एसआईआर के नाम पर गरीब, दलित और प्रवासी मतदाताओं के वोट काटे जा रहे: आप

नई दिल्ली, 17 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया है कि एसआईआर के नाम पर बड़े पैमाने पर गरीब, प्रवासी और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों के वोट जानबूझकर काटे जा रहे हैं। पार्टी का दावा है कि भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग ने पहले ही प्री-एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लगभग 14 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए, जिससे वे अब एसआईआर प्रक्रिया में भी हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया में तीन स्तरों पर अनियमितताएं की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले प्री-एसआईआर के दौरान लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए। इसके बाद गरीब और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों तक गणना (एन्यूमरेशन) फॉर्म नहीं पहुंचाए गए, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में 100 प्रतिशत फॉर्म वितरण का दावा किया जा रहा है। इसके अलावा जिन लोगों की झुग्गियां हटाई गईं और जिन्हें सरकार द्वारा फ्लैट आवंटित किए गए, उन्हें भी बीएलओ द्वारा फॉर्म नहीं दिए जा रहे हैं।

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि गर्मियों की छुट्टियों के दौरान बड़ी संख्या में प्रवासी परिवार अपने गृह राज्यों में थे। इसी दौरान प्री-एसआईआर की प्रक्रिया पूरी कर उनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। उनका आरोप है कि अब इन लोगों को गणना फॉर्म भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा, जिससे वे मतदाता सूची में अपना नाम दोबारा दर्ज कराने की प्रक्रिया में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।

बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से गरीब और प्रवासी मतदाताओं के मतदान अधिकार छीनने के लिए अपनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि बीएलओ किसी घर पर पहुंचा और घर बंद मिला तो मतदाता को अनुपस्थित मान लिया गया, जबकि किरायेदारों के मकान बदलने पर उन्हें शिफ्टेड बताकर सूची से बाहर कर दिया गया। उनका कहना है कि ऐसे लाखों लोग अब एसआईआर प्रक्रिया में भी भाग नहीं ले पाएंगे क्योंकि उन्हें आवश्यक फॉर्म ही नहीं मिल रहे हैं।

कोंडली से विधायक कुलदीप कुमार ने भी आरोप लगाया कि कई स्थानों पर बीएलओ घर-घर जाकर फॉर्म वितरित करने के बजाय औपचारिकताएं पूरी कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई गांवों और बस्तियों में लोगों को फॉर्म नहीं मिले, जबकि रिकॉर्ड में सभी फॉर्म वितरित दिखाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य गरीब, दलित, पिछड़े और प्रवासी मतदाताओं के वोट खत्म करना है।

वहीं, विकास गोयल ने कहा कि पिछले डेढ़ वर्ष में जिन हजारों झुग्गियों को हटाया गया और जिन लोगों को सरकार ने फ्लैट आवंटित किए, उन्हें भी बीएलओ द्वारा गणना फॉर्म नहीं दिए जा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार के पास इन लोगों का पूरा रिकॉर्ड मौजूद होने के बावजूद उन्हें मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है।

आम आदमी पार्टी ने चुनाव आयोग से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा प्रक्रिया में शामिल करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मतदान का अधिकार प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और किसी भी पात्र मतदाता को इससे वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

--आईएएनएस

पीकेटी/वीसी

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