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दिल्ली में रावण के साथ कॉक्रोच के पुतले का भी दहन, दशहरा में दिखी अनोखी परंपरा

दिल्ली में रावण के साथ कॉक्रोच के पुतले का भी दहन, दशहरा में दिखी अनोखी परंपरा
दिल्ली में रावण के साथ कॉक्रोच के पुतले का भी दहन, दशहरा में दिखी अनोखी परंपरा

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर (आईएएनएस)। दिल्ली के नेताजी सुभाष प्लेस में दशहरा समारोह के दौरान केशव रामलीला समिति ने रावण के पुतले के साथ कॉक्रोच के पुतले का भी दहन किया। दशहरा उत्सव के दौरान कॉक्रोच के पुतले का दहन आकर्षण का केंद्र रहा।

देशभर में दशहरा के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया गया। वहीं, दिल्ली के पीतमपुरा में कॉक्रोच का 30 फुट ऊंचा पुतला जलाने की अनोखी परंपरा भी देखने को मिली। दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड में दशहरा समारोह की तैयारियां पूरी की गई थीं।

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राजेंद्र निवास रामलीला समिति ने रावण का 32 फुट ऊंचा पुतला तैयार किया था। इसके दहन का कार्यक्रम रात 10 बजे निर्धारित किया गया था। समिति के संरक्षक प्रभाकर मिश्रा के अनुसार, इस वर्ष पुतला बनाने की जिम्मेदारी मुस्लिम कारीगरों को दी गई थी।

लखनऊ के रामलीला मैदान में 75 फुट ऊंचा रावण का पुतला तैयार किया गया था, जिसमें यांत्रिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया। आयोजकों के अनुसार, पुतले के माध्यम से कथित तौर पर राष्ट्रविरोधी और सनातन विरोधी तत्वों तथा बौद्धिक नक्सलवाद के खिलाफ संदेश देने का प्रयास किया गया।

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में लक्ष्मण चौक स्थित हिंदू नेशनल इंटर कॉलेज में रावण दहन का आयोजन किया गया। लक्ष्मण चौक वेलफेयर सोसाइटी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शामिल होने का कार्यक्रम था। वहीं, काशीपुर में 55 फुट ऊंचे रावण और 50 फुट ऊंचे कुंभकर्ण के पुतलों का शाम 7.30 बजे दहन किया जाना था। इसके बाद आतिशबाजी का आयोजन निर्धारित था।

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में भी इस वर्ष दशहरा समारोह विशेष रहा। वहां पहली बार ऐतिहासिक दशहरा आयोजन के तहत 50 फुट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाना था। रामलीला मैदान में कुंभकर्ण का 45 फुट और मेघनाद का 35 फुट ऊंचा पुतला भी तैयार किया गया था।

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के भाटखेड़ी (रावण वाली) गांव में दशहरा मनाने की परंपरा देश के अन्य हिस्सों से अलग है। यहां ग्रामीण रावण और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन करने के बजाय उनकी पूजा करते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि रावण उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं और प्रसाद चढ़ाते हैं। दशहरे से पहले रावण और कुंभकर्ण की प्रतिमाओं की रंगाई-पुताई की जाती है। दशहरे के दिन भगवान राम और लक्ष्मण की भूमिका निभाने वाले कलाकार प्रतिमाओं को भाले से स्पर्श करते हैं, जबकि ग्रामीण समृद्धि की कामना करते हैं।

झारखंड की राजधानी रांची में पंजाबी हिंदू बिरादरी की ओर से मोरहाबादी मैदान में पारंपरिक रावण दहन का आयोजन किया जाना था। इस कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के शामिल होने का कार्यक्रम निर्धारित था। यहां रावण का 70 फुट, कुंभकर्ण का 65 फुट और मेघनाद का 60 फुट ऊंचा पुतला तैयार किया गया था। आयोजन में रामलीला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आतिशबाजी भी प्रमुख आकर्षण रहने वाले थे।

--आईएएनएस

डीएससी

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