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दिल्ली में नितिन नवीन लेंगे पंजाब भाजपा नेताओं की बैठक, संगठन को मजबूती देने पर जोर

नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन को मजबूती देने और विधानसभा की चुनावी तैयारी के मध्य नजर दिल्ली में अहम बैठक आयोजित की जाएगी। भाजपा अध्यक्ष नीतिन नवीन और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में होगी बैठक।
दिल्ली में नितिन नवीन लेंगे पंजाब भाजपा नेताओं की बैठक, संगठन को मजबूती देने पर जोर

नई दिल्ली, 12 जून (आईएएनएस)। पंजाब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संगठन को मजबूती देने और विधानसभा की चुनावी तैयारी के मध्य नजर दिल्ली में अहम बैठक आयोजित की जाएगी। भाजपा अध्यक्ष नीतिन नवीन और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में होगी बैठक।

यह बैठक शाम 6:00 बजे भाजपा मुख्यालय विस्तार में होगी।

पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़ और पंजाब के संगठन मंत्री श्रीनिवास बैठक में मौजूद रहेंगे। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन गृह मंत्री अमित शाह संगठन महामंत्री बिल संतोष के अलावा तरुण चुघ बैठक में शामिल होंगे। इससे पहले कल गुरुवार को तमिलनाडु भाजपा की टीम के साथ कल शाम 6:00 बजे गृह मंत्री अमित शाह और नितिन नवीन ने इसी तरह की बैठक ली थी।

तमिलनाडु के बैठक में भी प्रदेश में बदली हुई परिस्थिति में भाजपा को जड़ तक कैसे मजबूत किया जाए इसको लेकर लंबी बैठक कर रणनीति बनाई गई थी।

इससे पहले पंजाब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर राज्य में डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और यूरिया की पर्याप्त एवं समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की।

पत्र में केवल सिंह ढिल्लों ने 6 जून को जेपी नड्डा के साथ हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान पंजाब के किसानों के लिए डीएपी और यूरिया की उपलब्धता पर विस्तार से चर्चा हुई थी। अब धान की बुआई का मौसम शुरू हो चुका है, इसलिए स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा में पंजाब की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। हर साल जून और जुलाई में धान की बुआई के दौरान राज्य के कई जिलों और खुदरा केंद्रों पर डीएपी और यूरिया की कमी देखने को मिलती है। इसके कारण किसानों को सहकारी समितियों और खाद बिक्री केंद्रों पर घंटों, कभी-कभी कई दिनों तक लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है। इससे बुआई में देरी होती है, जिसका सीधा असर फसल उत्पादन, पानी के बेहतर उपयोग और सरकारी खरीद व्यवस्था पर पड़ता है।

केवल सिंह ढिल्लों ने यह भी कहा कि खाद की कमी होने पर जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ जाती है। मजबूरी में किसानों को निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से अधिक कीमत पर खाद खरीदनी पड़ती है, जिससे उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ जाती है।

--आईएएनएस

एमएस/

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