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दिल्ली में कब है होलिका दहन? कालकाजी पीठाधीश्वर ने बताया शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। 3 मार्च को लगने वाले चंद्र ग्रहण की वजह से लोगों में कंफ्यूजन है कि होलिका दहन कब है।
दिल्ली में कब है होलिका दहन? कालकाजी पीठाधीश्वर ने बताया शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली, 2 मार्च (आईएएनएस)। 3 मार्च को लगने वाले चंद्र ग्रहण की वजह से लोगों में कंफ्यूजन है कि होलिका दहन कब है।

उत्तर प्रदेश और ब्रज मंडल के कई इलाकों में आज, यानी 2 मार्च को होलिका दहन होगा, जबकि कुछ स्थानों पर ग्रहण के बाद होलिका पूजन और दहन किया जाएगा। स्थिति को स्पष्ट करते हुए दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर ने साफ कर दिया है कि ग्रहण के प्रभाव के खत्म होने के बाद दिल्ली में होलिका दहन का शुभ समय रहेगा।

दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पीठाधीश्वर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "सनातन धर्म में होली को बुराई पर अच्छाई के रूप में मनाया जाता है। भगवान विष्णु के भक्त प्रह्लाद को होलिका ने आग में जलाने की कोशिश की थी, लेकिन वह खुद जलकर राख हो गई। इस बार होलिका दहन को लेकर भ्रम की स्थिति है। ग्रहण लगने की वजह से लोग भ्रम में हैं कि होलिका दहन 2 मार्च को किया जाए या फिर 3 मार्च को।"

उन्होंने आगे बताया कि होलिका दहन पूर्णिमा तिथि को भद्रा रहित होती है और इस बार पूर्णिमा 2 मार्च की शाम से शुरू हो रही है, लेकिन इसके साथ ही भद्रा का साया भी रहेगा। अगले दिन 3 मार्च को सूतक और चंद्र ग्रहण रहेगा। दिल्ली में ग्रहण का प्रभाव 7 बजे तक रहेगा और ऐसे में 7 बजे के बाद होलिका दहन किया जा सकता है। इस बार दिल्ली में 3 मार्च को 7 बजे के बाद ही होलिका दहन किया जाएगा।

रंगों की होली से पहले होलिका दहन की परंपरा सदियों से चली आई है। होलिका दहन को पवित्र माना जाता है क्योंकि मान्यता है कि सारी नकारात्मक ऊर्जा और शारीरिक रोग भी होलिका में दहन हो जाते हैं। होलिका दहन को सुख और समृद्धि का त्योहार माना जाता है, जो हर तरह के कष्टों से मुक्ति दिलाने में मदद करता है। इस होलिका दहन पूजन पर काले तिल और नारियल की आहुति जरूर दें। कहा जाता है कि काले तिल हमारे अंदर छिपी बुराई का नाश करते हैं, जबकि नारियल सुख- समृद्धि का प्रतीक होता है।

--आईएएनएस

पीएस/एएस

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