दिल्ली में जल संकट पर सियासत, 'आप' ने आंकड़ों में फर्जीवाड़े का लगाया आरोप
नई दिल्ली, 29 मई (आईएएनएस)। राजधानी दिल्ली में बढ़ते जल संकट को लेकर सियासत लगातार तेज होती जा रही है। आम आदमी पार्टी (आप) ने सरकार पर जल संकट के आंकड़ों में फर्जीवाड़ा करने का गंभीर आरोप लगाया है। 'आप' के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि दिल्ली सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को जल संकट की वास्तविक स्थिति छिपाते हुए झूठी रिपोर्ट भेजी है।
सौरभ भारद्वाज ने कहा कि सरकार यह दावा कर रही है कि दिल्ली के केवल 10 से 11 प्रतिशत इलाके ही जल संकट से प्रभावित हैं, जबकि हकीकत में करीब 30 से 40 प्रतिशत दिल्ली पानी की भारी किल्लत से जूझ रही है।
उन्होंने कहा कि राजधानी के कई इलाकों में लोगों को कई दिनों से नियमित जलापूर्ति नहीं मिल रही है और पानी के टैंकरों के लिए लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए गलत आंकड़े पेश कर रही है।
सौरभ भारद्वाज ने मांग की कि दिल्ली के जल मंत्री उन इलाकों की सूची सार्वजनिक करें, जिनके आधार पर सरकार यह दावा कर रही है कि केवल 10-11 प्रतिशत दिल्ली में जल संकट है।
उन्होंने कहा कि यदि सूची सार्वजनिक होती है तो आम आदमी पार्टी ऐसे कई इलाकों के नाम सामने ला सकती है जिन्हें जानबूझकर सूची से बाहर रखा गया है। आप नेता ने कहा कि पिछले करीब एक महीने से दिल्ली में पानी को लेकर हाहाकार की स्थिति बनी हुई है। कई कॉलोनियों में जलापूर्ति बाधित है और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न सिर्फ दिल्ली की जनता को गुमराह कर रही है, बल्कि प्रधानमंत्री कार्यालय को भी गलत जानकारी देकर वास्तविक हालात छिपा रही है। वहीं, बुराड़ी से विधायक और आप के वरिष्ठ नेता संजीव झा ने भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सोशल मीडिया पर लोगों से पक्षियों के लिए पानी रखने की अपील कर रही हैं, जो एक अच्छी पहल है, लेकिन उससे पहले दिल्लीवासियों को पीने का पानी उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
संजीव झा ने कहा कि राजधानी के कई इलाकों में पिछले 20 दिनों से दिल्ली जल बोर्ड की सप्लाई बंद पड़ी है। लोग पानी के टैंकरों के पीछे धक्के खाने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल फोटो और रील की राजनीति में व्यस्त है, जबकि जनता बुनियादी जरूरत पानी के लिए संघर्ष कर रही है।
--आईएएनएस
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