दिल्ली में 3 करोड़ रुपए के प्रॉपर्टी लोन घोटाले का खुलासा, मुख्य आरोपी मनीष कुमार गिरफ्तार
नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने करीब 3 करोड़ रुपए के प्रॉपर्टी लोन धोखाधड़ी मामले में मुख्य आरोपी मनीष कुमार को गिरफ्तार किया है। आरोपी को पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर स्थित उसके कार्यालय से पकड़ा गया। इस मामले में ईओडब्ल्यू थाने में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, यह मामला एम/एस प्रोटियम फाइनेंस लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि लवलीन मनचंदा की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि आनंद विहार के डी-ब्लॉक स्थित एक संपत्ति की खरीद के लिए करीब 3 करोड़ रुपए का हाउसिंग लोन फर्जी तरीके से हासिल किया गया।
जांच में पता चला कि 9 नवंबर 2022 को संपत्ति की बिक्री विलेख (सेल डीड) जाली दस्तावेजों के आधार पर तैयार की गई थी। इसमें एक महिला, जो अब मृत है, ने खुद को संपत्ति की वास्तविक मालिक बताकर सौदा किया। आरोप है कि उसी संपत्ति की 25 दिनों के भीतर दो फर्जी बिक्री विलेख तैयार की गई, जिसके आधार पर वित्तीय संस्थानों से लोन लिया गया।
ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि खुद को संपत्ति का वैध खरीदार बताने वाला मनीष कुमार इस पूरे फर्जीवाड़े का सक्रिय साजिशकर्ता था। आरोपियों ने जाली दस्तावेजों और फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर लोन प्राप्त किया। इसके बाद लोन की रकम को ठिकाने लगाने के लिए कई फर्जी कंपनियां और फर्म बनाई गईं।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने लोन दस्तावेजों में एक अन्य महिला (जो अब मृत है) को अपनी पत्नी और सह-आवेदक दिखाया था, जबकि उसकी वास्तविक पत्नी कोई और है।
पुलिस के मुताबिक, मनीष कुमार एम/एस ग्लोबल ट्रेडिंग कंपनी का संचालक है। उसने एम/एस ग्लोबल फाइनेंस लिमिटेड और एम/एस बांके बिहारी एंटरप्राइजेज जैसी फर्जी कंपनियां बनाकर जाली दस्तावेजों के जरिए प्रोटियम फाइनेंस से लगभग 3 करोड़ रुपए का लोन हासिल किया।
गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के कब्जे से कई मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट, विभिन्न बैंकों की चेकबुक, पीओएस मशीनें और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, 59 वर्षीय मनीष कुमार स्नातक है और पूर्वी दिल्ली में फाइनेंसर तथा लोन फैसिलिटेटर के तौर पर काम करता था।
ईओडब्ल्यू ने लोगों को सलाह दी है कि वे अपनी संपत्तियों को लंबे समय तक बिना निगरानी के न छोड़ें और समय-समय पर उनकी स्थिति की जांच करते रहें। वहीं, बैंक और वित्तीय संस्थानों से कहा गया है कि विशेष रूप से लंबे समय से खाली पड़ी संपत्तियों के खिलाफ लोन मंजूर करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें।
--आईएएनएस
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