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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को मानहानि मामले में दी राहत

नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को मानहानि के मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती की पत्नी लिपिका मित्रा द्वारा दायर की गई मानहानि की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि इस याचिका में वित्त मंत्री के खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं बनता।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को मानहानि मामले में दी राहत

नई दिल्ली, 1 अप्रैल (आईएएनएस)। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को मानहानि के मामले में बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती की पत्नी लिपिका मित्रा द्वारा दायर की गई मानहानि की शिकायत पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि इस याचिका में वित्त मंत्री के खिलाफ कोई ठोस आधार नहीं बनता।

यह मामला 17 मई 2024 को हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ा है। लिपिका मित्रा ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि निर्मला सीतारमण ने उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उनके पति सोमनाथ भारती के वैवाहिक जीवन से जुड़ी कुछ बातें कहीं थीं। शिकायतकर्ता का दावा था कि ये बयान झूठे और अपमानजनक थे। उन्होंने यह भी कहा कि वित्त मंत्री ने ये टिप्पणियां सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए की थीं, ताकि भाजपा के उम्मीदवार को लोकसभा चुनाव में लाभ पहुंचाया जा सके और उनके पति को नुकसान पहुंचाया जा सके।

लिपिका मित्रा ने कोर्ट को बताया था कि इन बयानों की वजह से उन्हें और उनके परिवार को काफी मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि इन टिप्पणियों ने उनके बच्चों को भी प्रभावित किया और सोमनाथ भारती की चुनावी छवि को ठेस पहुंचाई। शिकायत में यह भी कहा गया कि मंत्री के बयानों का मकसद केवल राजनीतिक लाभ हासिल करना था।

राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुनाया कि निर्मला सीतारमण के बयानों पर आधारित यह मानहानि की याचिका संज्ञान के लायक नहीं है। कोर्ट ने कहा कि इसमें वित्त मंत्री के खिलाफ कोई ठोस सबूत या आधार नहीं मिलता, इसलिए याचिका खारिज की जाती है। इस फैसले से केंद्रीय वित्त मंत्री को राहत मिली है।

कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि राजनीतिक चर्चाओं में दिए गए बयानों को हमेशा मानहानि का आधार नहीं माना जा सकता, जब तक कि उनमें स्पष्ट रूप से कोई गलत इरादा और सबूत न हो।

--आईएएनएस

पीएम

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